रडार पर रहेंगे ज्यादा विरोध वाले नवनिुयक्त जिलाध्यक्ष…?

महाकौशल की डायरी
अविनाश दीक्षित

संगठन को मजबूती देने के लिहाज से कांग्रेस में संगठन सृजन अभियान चलाया गया। महाकौशल के साथ ही समूचे प्रदेश के अनेक जिलों में नए जिलाध्यक्ष बनाए गए और कुछ जिलों में पुराने जिला कांग्रेस अध्यक्षों को बरकरार रखा गया। इरादा तो कांग्रेस संगठन के सशक्तिकरण का रहा किंतु जैसे ही नवनिुयक्त जिलाध्यक्षों की सूची सार्वजनिक हुई वैसे ही अनेक जिलों में विरोध के स्वर उठना शुरू हो गए जो अभी भी जारी हैं।

महाकोशल के जबलपुर, बालाघाट, सिवनी, डिंडोरी सहित विंध्य के शहडोल, अनूपपुर जिलों में नए जिलाध्यक्षों के खिलाफ विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म में कटाक्ष और आरोपों के ऐसे तीर चले कि पार्टी के शीर्ष नेताओं को बयान जारी करना पड़ गया कि विरोध जता रहे कांग्रेसजन पार्टी फोरम में अपनी बात रखें, सोशल मीडिया का सहारा ना लें।

इसके बाद सोशल मीडिया में विरोध का हो-हल्ला कुछ कम नजर आया, मगर विरोध स्वरूप मुंडन कराने, प्रदर्शन किए जाने से यह बात तो जाहिर हो ही गई कि जिस तथाकथित रायशुमारी का चोला पहनकर पार्टी नेताओं ने निर्णय लिए उसमें विश्वसनीयता, सर्वस्वीकार्यता की जगह मनमानी ज्यादा नजर आई। फिलहाल कंाग्रेस के गलियारों में चर्चा है कि मप्र में नियुक्त जिलाध्यक्षों को लेकर सबसे ज्यादा शिकायतें राहुल गांधी तक पहुंचीं हैं।

जिन्होंने नाराजगी जाहिर करते हुए नियुक्तियों के लिए जिम्मेदार संगठन के नेताओं को निर्देश दिए हैं कि मध्यप्रदेश में जो गलती हो गईं हैं वैसी गलती अन्य राज्यों में न हो और ना ही उनके पास कोई शिकायत पहुंचे। राहुल के इस रूख के बाद कयास लगाए जा रहे हैं कि नवनियुक्त जिलाध्यक्षों में से कई को हटाया जा सकता है। ऐसे में उन जिलाध्यक्षों की नींद उड़ गई है जिनका ज्यादा विरोध हो रहा है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि कांग्रेस का संगठन पहले से ही कमजोर रहा है और यदि नियुक्ति के बाद नवनियुक्त जिलाध्यक्ष को हटाया जाता है तो दूसरे अन्य नेता क्या विरोध नहीं जताएंगे और फिर इनको किस तरह संतुष्ट किया जाएगा।

कांग्रेस के प्रदर्शन ने भाजपाईयों को चौंकाया

जबलपुर में वीरांगना रानी दुर्गावती फ्लाई ओवर ब्रिज का कुछ माह पहले कांग्रेस ने जब सांकेतिक रूप से लोकार्पण किया था तो उस वक्त कांग्रेस के प्रदर्शन में पूर्व विधायक संजय यादव, जिला अध्यक्ष सौरभ नाटी शर्मा के अलावा कोई स्थानीय बड़ा कांग्रेस का चेहरा शामिल नहीं था। न तो इस दौरान पूर्व मंत्री लखन घनघोरिया , तरूण भनोत इस कार्यक्रम में शामिल हुए थे और न ही पूर्व विधायक विनय सक्सेना…इसके बाद से जबलपुर में यह चर्चा होने लगी थी कि कांग्रेस नेताओं में एकजुटता के अभाव के साथ गुटबाजी हावी हो चुकी है।

लेकिन हाल ही में वोट चोरी के खिलाफ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के शहर में कदम रखने के बाद कांग्रेस ने जो एकजुटता के साथ शक्ति प्रदर्शन किया है उससे आमजनों के साथ ही भाजपाई भी चकित हो गए हैं। इस प्रदर्शन में पूर्व मंत्री, विधायक लखन घनघोरिया, पूर्व विधायक विनय सक्सेना के साथ सभी कांग्रेसियों की मौजूदगी रही। यहां तक तो बात ठीक ही थी लेकिन राजनैतिक गलियारों में यह सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर कुछ ही समय में कांग्रेस के अंदर ऐसा क्या हो गया है जिससे गुटबाजी में उलझे जबलपुर के कांग्रेसी नेता एकजुट हो गए?

चर्चा है कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को राहुल गांधी के द्वारा स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि संगठन सृजन अभियान के तहत अब कांग्रेस में एकजुटता चरम पर लाई जाए और कहीं से भी यह जाहिर न हो कि पार्टी में एकजुटता का अभाव है। दूसरी ओर यही चर्चा की जा रही है कि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के समक्ष स्थानीय कांग्रेस नेताओं ने शक्ति प्रदर्शन इसलिए किया क्योंकि वे अपना रिपोर्ट कार्ड दुरूस्त करवा सकें और 2028 में होने वाले विधानसभा चुनाव में उन्हें या उनके समर्थकों को उपकृत करा सकें। फिलहाल कांग्रेस के शक्ति प्रदर्शन से भाजपाई खेमे में भी चिंतन मनन का दौर चलने लगा है। अनेक भाजपाई भी कहते सुने जा रहे हैं कि जबलपुर में वोट न्याय यात्रा को कांग्रेस ने जिस तरह प्रदर्शित किया है और यही आलम बना रहा तो आने वाले कुछ समय में कांग्रेस भाजपा के समक्ष कड़ी चुनौती रख सकती है।

एफआईआर तक पहुंचने लगी बात…

हर तालिका तीज के दिन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के महिलाओं को लेकर दिए गए बयान का अनुसरण कर जबलपुर में सोशल मीडिया पर टिप्पणी करने का पहला मामला सामने आ गया है। जब कांग्रेस के पूर्व पार्षद शाबान मंसूरी ने बयान पर सहमति जताकर टिप्पणी की तो भाजपाईयों ने उनके खिलाफ घमापुर पुलिस थाना में एफआईआर दर्ज करा दी। सर्वविदित है कि 50 प्रतिशत आबादी महिलाओं की है। ऐसे में भविष्य में कांग्रेस के लिए प्रदेश अध्यक्ष का ऐसा बयान महिलाओं पर क्या असर डालेगा, इस पर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं लेकिन इसका परिणाम क्या होगा ये तो आने वाला समय ही बताएगा।

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