इंदौर: इंदौर संभाग की तीन हजार से ज्यादा सहकारी संस्थाओं के रजिट्रेशन निरस्त करने की कार्रवाई चल रही है. सहकारिता विभाग ने प्रदेश सरकार के आदेश पर अभी तक 260 सहकारी संस्थाओं के पंजीयन निरस्त कर भी दिए हैं. सबसे ज्यादा 71 सहकारी संस्थाओं के पंजीयन इंदौर जिले में निरस्त किए जा चुके हैं.प्रदेश सरकार ने पिछले दिनों गजट नोटिफिकेशन जारी कर आदेश दिए है कि प्रदेश में 10 वर्ष या अधिक समय से बंद पड़ी या कोई गतिविधि नहीं करने वाली सहकारी संस्थाओं के रजिस्ट्रेशन निरस्त कर दिए जाए.
सहकारिता विभाग को प्रदेश सरकार ने 31 मार्च 2026 तक समय दिया है. उक्त अवधि में सभी जिलों को बंद पड़ी या किसी भी गतिविधि सक्रियता से कार्य नहीं कर रही सहकारी संस्थाओं के पंजीयन निरस्त करना है. उक्त आदेश के पालन में हर सप्ताह जिला कलेक्टर और संभागायुक्त द्वारा मॉनिटरिंग की जा रही है. सभी सहकारिता उपायुक्त को हर माह कम से कम 20 सहकारी संस्थाओं के पंजीयन निरस्त करने का लक्ष्य भी दिया गया है. इंदौर सहकारिता उपायुक्त को 50 संस्थाएं हर माह निरस्त करने का लक्ष्य तय किया है.
इंदौर संभाग के आठ जिलों में 3298 सहकारी संस्थाओं के पंजीयन है, जो निष्कि्रय है. इसमें ऐसी संस्थाओं को शामिल नहीं किया गया है, जिन पर शासन की देनदारी है. मतलब यह है कि शासन द्वारा आर्थिक या लोन के रूप में दिया गया पैसा वापस देना है. इंदौर संभाग में अभी आठों जिलों में 260 सहकारी संस्थाओं के पंजीयन निरस्त कर दिए गए हैं. 1189 संस्थाओं का रजिट्रेशन निरस्त करने की कारवाई चल रही है. करीब 38 संस्थाओं को पुनर्जीवित किया गया है. कुल 3298 सहकारी संस्थाओं में 2995 निरस्तीकरण किए जाने की कारवाई हर महीने लक्ष्य के अनुसार चल रही है.
इनका कहना है
संयुक्त आयुक्त सहकारिता बी.एल. मकवाना ने बताया कि प्रदेश सरकार के आदेश पर सहकारी संस्थाओं के पंजीयन निरस्त की कारवाई चल रही है. अभी तक तीन हजार से ज्यादा निष्कि्रय संस्थाएं इंदौर संभाग में सूचीबद्ध की है. उसमें हर सप्ताह संभागायुक्त मॉनिटरिंग कर रहे हैं. यह वे संस्थाएं हैं जो पिछले 10 सालों से कोई सहकारी गतिविधि नहीं कर रही है.
एक नजर में
संभाग के जिलों में 3298 परिसमापन सहकारी संस्थाओं की संख्या निम्न है और उनमें से 260 संस्थाओं के पंजीयन निरस्त हो चुके है. शेष संस्थाओं में निरस्त करने की कारवाई जारी है.
1. इंदौर की 877 में से 71
2. धार की 1251 में से 34
3. खरगोन की 250 में से 43
4. बड़वानी की 214 में से 37
5. खंडवा की 211 में से 9
6. बुरहानपुर की 346 में से 0
7. झाबुआ की 94 में से 32
8. अलीराजपुर की 55 में से 34
