
इंदौर. पत्रकारों पर बढ़ते हमलों के बीच इंदौर की अदालत ने गुरुवार को ऐसा फैसला सुनाया है जिसे देशभर में ऐतिहासिक माना जा रहा है. 16 साल पुराने मामले में पत्रकार पर जानलेवा हमले के दोषी पाए गए पांच वकीलों को अदालत ने सजा सुनाई.
24वीं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश की अदालत ने चार वकीलों को सात-सात वर्ष का सश्रम कारावास और एक वृद्ध अधिवक्ता को तीन वर्ष की साधारण कैद की सजा दी. संभवतः यह देश का पहला प्रकरण है जिसमें एक ही मामले में पांच वकीलों को एकसाथ दंडित किया है.
मामला वर्ष 2009 का है, उज्जैन न्यायालय परिसर में पांचों वकीलों ने पत्रकार घनश्याम पटेल पर हमला कर गंभीर चोटें पहुंचाई थीं. हमले के दौरान उनकी लाइसेंसी रिवॉल्वर, सोने की चेन और घड़ी भी लूट ली गई थी. घटना के बाद पीड़ित पत्रकार लंबे समय तक उज्जैन और फिर इंदौर के अस्पताल में भर्ती रहे.
अभियोजन के अनुसार, घटना से पहले आरोपियों ने पत्रकार को जान से मारने की धमकी भी दी थी. हमले के बाद आरोपियों ने अपने बचाव में एक एडिटेड सीडी न्यायालय में पेश की थी. जांच में पाया गया कि उसमें चोट और हमले के दृश्य छेड़छाड़ कर हटाए गए थे. अदालत ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए सभी को हत्या के प्रयास का दोषी ठहराया. चार वकीलों को सात साल का सश्रम कारावास सुनाते हुए अदालत ने कहा कि इस तरह की हरकतें न केवल पीड़ित को बल्कि न्याय व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों को भी चोट पहुंचाती हैं. वृद्ध आरोपी को उसकी आयु को देखते हुए तीन साल की साधारण कैद दी गई. यह फैसला पत्रकारों की सुरक्षा और न्यायपालिका की सख्ती, दोनों के लिहाज से ऐतिहासिक माना जा रहा है.
