ग्वालियर: लगातार नगर निगम की जनसुनवाई और जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र कार्यालय पर ऐसे कई लोग पहुंच रहे हैं, जिनके मृत्यु प्रमाण पत्र फर्जी तरीके से बनाए गए हैं. ऐसे में जिम्मेदार अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच पड़ताल की जा रही है. संभवत: इसके पीछे कोई रैकेट कम कर रहा है.शहर में दो दर्जन से अधिक सरकारी कागज में मरे हुए लोग नगर निगम ऑफिस और जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र कार्यालय में खुद के जिंदा होने का सबूत लेकर चक्कर काट रहे हैं.
ऐसे में निगम अफसर हैरान-परेशान हैं, क्योंकि इन सभी जीवित व्यक्तियों के मृत्यु प्रमाण पत्र का रिकॉर्ड उनके पास है. वहीं, सरकारी दस्तावेजों में मरे हुए जीवित लोगों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है. ऐसे मृत जीवित लोग सीएम हेल्पलाइन पर भी खुद को जीवित करने की गुहार लगा रहे हैं. वहीं, इस मामले में आर्थिक अन्वेषण ब्यूरो भी जांच पड़ताल में जुटी है.
ग्वालियर नगर निगम दफ्तर और जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र कार्यालय में हर दिन ऐसे लोग पहुंच रहे हैं, जिन्हें खुद के जीवित होने का प्रमाण देना पड़ रहा है, क्योंकि निगम के रिकॉर्ड में उनकी मृत्यु हो चुकी है.इनमें से एक है ग्वालियर शहर के गोसपुरा नम्बर 1 में रहने वाली जीवित 80 साल की बुजुर्ग शांति बाई, जिन्हें सरकारी दस्तावेजों में 01 जुलाई 2025 को ही मृत घोषित कर दिया गया.
जिसके चलते उन्हें वृद्धा पेंशन और पीडीएस का राशन अब मिलना बंद हो गया है और उन्हें खुद की मौत होने की जानकारी समग्र आईडी की केवायसी कराने के दौरान मिली. अब उनकी समग्र आईडी पन्ना जिले के वार्ड नंबर 10 नगर पालिका क्षेत्र में रहने वाले बरसात खान नाम के व्यक्ति को दे दी गई है और बरसात के परिजन हजरा, इमाम, नाजिया, अमना,आयाम सरकारी योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं. ऐसे में अब बुजुर्ग शांति बाई ने सीएम हेल्पलाइन पर खुद को जीवित करने की गुहार लगाई है.
