टैरिफ वार और जय किसान

अहमदाबाद की धरती से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस स्वर में घोषणा की, उसने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि भारत अब किसी भी दबाव में झुकने वाला नहीं है. अमेरिका ने ऐलान किया है कि 27 अगस्त से वह भारत पर 50 $फीसदी टैरिफ लगाएगा. कारण यह बताया जा रहा है कि भारत डेयरी और कृषि उत्पादों पर ऊंचे टैरिफ लगाकर अमेरिकी उत्पादों को बाजार में प्रवेश नहीं करने देता. लेकिन असली सवाल यह है कि क्या भारत अपने किसानों और पशुपालकों की मेहनत को विदेशी कंपनियों की शर्तों पर बलिदान कर दे ?

प्रधानमंत्री मोदी ने अहमदाबाद के मंच से साफ कहा कि भारत अपने किसानों और पशुपालकों के हितों की रक्षा हर कीमत पर करेगा. हमारा देश किसी भी धमकी या दबाव के आगे नहीं झुकेगा.यह बयान केवल एक भाषण नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की दिशा में ठोस संदेश है.

आज भारत का किसान केवल अन्नदाता ही नहीं, बल्कि अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. दूध, दाल, अनाज, सब्जी, फल और पशुपालन से जुड़ा हर छोटा परिवार भारत की ग्रामीण संस्कृति का हिस्सा है. अगर विदेशी सस्ते उत्पाद बेधडक़ बाजार में उतरते हैं, तो सबसे बड़ा झटका इन्हीं परिवारों को लगेगा. ऐसे में सरकार का यह दायित्व बनता है कि वह अपने नागरिकों के श्रम, पसीने और रोज़गार की रक्षा करे. मोदी ने यह दायित्व निभाने का वादा जनता के सामने दोहराया.

अमेरिका जैसे बड़े देश अपने किसानों को अरबों डॉलर की सब्सिडी देते हैं. जब वे ऐसा करते हैं, तो उसे “कृषि सुरक्षा” कहा जाता है.

लेकिन जब भारत अपने किसानों के लिए शुल्क बढ़ाता है, तो उसे “व्यापारिक बाधा” कहा जाने लगता है. यह दोहरे मानदंड का जीता-जागता उदाहरण है. प्रधानमंत्री मोदी ने इसी पाखंड को बेनकाब किया है.

भारत की 60 $फीसदी से अधिक आबादी प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से कृषि पर निर्भर है. ऐसे में भारत के लिए किसानों और पशुपालकों की रक्षा केवल आर्थिक नीति का सवाल नहीं, बल्कि राष्ट्रीय स्वाभिमान का विषय है. यह वही भारत है जो समझौते की मेज पर बैठकर चर्चा तो करेगा, लेकिन घुटनों के बल कभी नहीं झुकेगा.

अहमदाबाद से प्रधानमंत्री का यह संदेश केवल किसानों के लिए राहत का आश्वासन नहीं, बल्कि युवाओं और उपभोक्ताओं के लिए भी आत्मविश्वास का परिचायक है. जब सरकार किसानों को मजबूत करेगी, तभी आत्मनिर्भर भारत की राह मजबूत होगी. यही कारण है कि गुजरात का “अमूल मॉडल” आज दुनिया भर में मिसाल बन चुका है. लाखों दुग्ध उत्पादकों ने सहकारिता के माध्यम से न केवल रोजगार पाया, बल्कि भारत को दुग्ध उत्पादन में विश्व का अग्रणी देश बना दिया. यही उदाहरण दिखाता है कि जब किसान और पशुपालक सुरक्षित होते हैं, तो पूरी अर्थव्यवस्था सुरक्षित होती है. बहरहाल,

टैरिफ युद्ध आने वाले दिनों में और तेज़ हो सकता है. लेकिन इस चुनौती में भी एक अवसर छिपा है. यदि भारत अपने किसानों और उद्योगों को संरक्षण देकर घरेलू उत्पादन बढ़ाए, तो यह संकट आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत भी बन सकता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रुख इसी दिशा की ओर इशारा करता है.अहमदाबाद की गूंज यही कहती है कि भारत किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगा, क्योंकि किसान की रक्षा ही राष्ट्र की रक्षा है. यही है असली जय जवान, जय विज्ञान, और जय किसान.

 

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