
भोपाल। महाराष्ट्र में काम करने गए भोपाल के कुछ मजदूरों को फैक्ट्री में बंधक बनाने का मामला सामने आया है. पुलिस कमिश्नर कार्यालय में मामले की शिकायत की गई है. मामले में कार्रवाई शुरू कर दी गई है.
जहांगीराबाद इलाके में रहने वाले दो मजदूर फैक्ट्री से भागने में सफल रहे. भोपाल अपने घर वापस आए मजदूरों ने पूरी घटना और अपनी आपबीती पुलिस और परिजनों को सुनाई है. करीब 5 मजदूरों के फैक्ट्री में फंसे होने का मामला संज्ञान में आया है. इन मजदूरों को कर्नाटक में काम देने का झांसा देकर महाराष्ट्र में एक फैक्ट्री में पहुंचाते हुए बंधक बनाया गया.
मिली जानकारी के मुताबिक कर्नाटक में काम दिलवाने का झांसा देकर भोपाल के रहने वाले युवकों को ले जाया गया. हाल ही में महाराष्ट्र के नांदेड़ से जान बचाकर भागे दो मजदूरों शमीम और विशाल ने इस पूरी घटना की जानकारी साझा की है. फैक्ट्री में बंधक से आजाद हुए मजदूरों के मुताबिक एक खास गिरोह युवाओं को प्रलोभित कर मुंबई ले जाता है. गिरोह का मुख्य एजेंट अभिषेक है, जो रेलवे स्टेशन और प्रमुख चौराहों पर उन मजदूरों को निशाना बनाता है. अभिषेक काम की तलाश में भटक रहे मजदूरों से बात करते हुए उन्हें झांसे में लेता है. 26 दिसंबर को धर्मेंद्र, विशाल और शकील समेत कई मजदूरों को 600 रुपये रोजाना और मुफ्त ऐशो-आराम का झांसा देकर ट्रेन में बैठाया गया. कर्नाटक जाने की बात कहकर उन्हें जानबूझकर महाराष्ट्र के नांदेड़ रोड स्थित एक तुअर दाल प्रोसेसिंग यूनिट में पहुंचाया गया.
सभी को एक युवक ने महाराष्ट्र की एक फैक्ट्री में छोड़ा, जहां मजदूरों को बंधक बना लिया गया. पीड़ित शमीम और विशाल ने बताया कि वहां के हालात किसी जेल से भी बदतर हैं. मजदूरों के मोबाइल छीन लिए जाते हैं, जिससे कि वे किसी से संपर्क न कर सकें. दिन-रात काम कराने के बावजूद जब मजदूरों ने वेतन की मांग की, तो उन्हें लाठियों से पीटा गया. उन्होंने बताया कि मजदूरों को बताया जाता है वहां कि तुम्हें खरीदा गया है. सभी को दो समय का रूखा-सूखा खाना देकर 18 घंटे काम कराया जाता है. फैक्ट्री में फंसे अपने अन्य साथियों की मदद के लिए भी फरियादियों ने पुलिस से गुहार लागई है.
