
सीधी । कलेक्ट्रेट कार्यालय में मंगलवार दोपहर एक अनोखा और चौंकाने वाला दृश्य देखने को मिला, जब आदिवासी और दलित समाज से जुड़े कई बुजुर्ग किसान पुलिस जैसी वर्दी पहनकर सैनिकों की चाल में कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर पहुंचे। अचानक वर्दीधारी लोगों को देखकर कुछ समय के लिए प्रशासनिक अमले में भी हलचल मच गई। बाद में इन लोगों ने खुद को एक सामाजिक संगठन से जुड़ा बताते हुए कहा कि वे समाज की सुरक्षा और किसानों की समस्याओं को लेकर संगठित प्रयास कर रहे हैं। संगठन के क्षेत्र उपाध्यक्ष छोटेलाल सिंह टेकाम ने बताया कि वे लोग जब खेतों में रहते हैं तो केवल किसान कहलाते हैं, लेकिन जैसे ही खेत से बाहर निकलते हैं, तब उनकी समस्याओं को सुनने वाला कोई नहीं होता। आए दिन शोषण, अत्याचार और प्रशासनिक उपेक्षा का सामना करना पड़ता है। इसी वजह से दलित और आदिवासी समाज के लोगों ने आपस में मिलकर संगठन बनाने का निर्णय लिया है, ताकि अपनी आवाज को मजबूती से उठा सकें और अपनी सुरक्षा खुद कर सकें।
जिला मंत्री पन्नालाल सिंह मरावी ने कहा कि संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष राजमाता फुलवा देवी हैं, जो नई दिल्ली में निवास करती हैं। उन्हीं के निर्देश पर जिले में संगठन का विस्तार किया जा रहा है और कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। उन्होंने बताया कि संगठन का उद्देश्य किसी भी तरह का टकराव नहीं है, बल्कि समाज में फैले भ्रष्टाचार, अत्याचार और आपसी विवादों को समाप्त करना है। यदि प्रशासन उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लेता है, तो संगठन कानूनी तरीके से न्यायालय और उच्च न्यायालय की शरण लेने के लिए भी तैयार है।संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार, सिंगरौली जिले में अब तक करीब 400 वर्दीधारी कार्यकर्ता तैयार किए जा चुके हैं, जबकि सीधी जिले में फिलहाल 15 सदस्य सक्रिय हैं। मंगलवार को यही 15 सदस्य कलेक्ट्रेट पहुंचे और अपर कलेक्टर बीपी पाण्डेय को ज्ञापन सौंपते हुए संगठन को पंजीकृत किए जाने और पहचान पत्र जारी करने की मांग की।कलेक्ट्रेट पहुंचे सदस्यों में जिला अध्यक्ष बबन सिंह पोया, जिला मंत्री पन्नालाल सिंह मरावी, क्षेत्र उपाध्यक्ष छोटेलाल सिंह टेकाम, जिला उपसचिव गुलाब सिंह नेताम, जगजाहिर सिंह नेटिया और लक्ष्मण सिंह शामिल रहे। यह घटना जिले में दिनभर चर्चा का विषय बनी रही।
वैधानिक मान्यता नहीं दी जा सकती-अपर कलेक्टर
इस पूरे मामले पर अपर कलेक्टर बीपी पाण्डेय ने साफ शब्दों में कहा कि कोई भी संगठन जब तक विधिवत पंजीकृत नहीं होता, तब तक उसे किसी भी प्रकार की वैधानिक मान्यता नहीं दी जा सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्दी पहनकर या स्वयं को किसी प्रकार की शक्ति का प्रतीक बताकर कानून अपने हाथ में लेना पूरी तरह गलत है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि संगठन यदि शांतिपूर्वक लोगों को जागरूक करता है और उनकी समस्याओं को प्रशासन तक पहुंचाता है, तो उस पर कोई आपत्ति नहीं है।
