नशे का जाल तोड़े बिना समाज सुरक्षित नहीं !

इंदौर में लगातार सामने आ रही नशीले पदार्थों की बरामदगी की घटनाएं अब केवल पुलिस खबर नहीं रह गई हैं, बल्कि पूरे समाज के लिए चिंता का विषय बन चुकी हैं. द्वारकापुरी इलाके में 48 लाख रुपये नकद और ब्राउन शुगर की बरामदगी हो या फिर हाल के दिनों में करोड़ों की एमडी ड्रग्स जब्ती—ये घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि शहर नशे के जाल में तेजी से फंसता जा रहा है. पुलिस भले ही हर बड़ी खेप को पकडऩे में सफलता हासिल कर रही हो, लेकिन यह भी उतना ही बड़ा सच है कि तस्करी का यह नेटवर्क लगातार फैलता जा रहा है. केवल इंदौर ही नहीं मध्य प्रदेश के अनेक शहर इस बीमारी से ग्रसित हो रहे हैं . आखिर यह नशे का कारोबार इतनी आसानी से हमारे बीच तक पहुंच कैसे रहा है ? नशीले पदार्थों का खतरा केवल उन युवाओं तक सीमित नहीं है जो इसकी लत में पड़ते हैं. इसका असर पूरे परिवार, समाज और कानून-व्यवस्था पर पड़ता है. नशे की गिरफ्त में आया युवा अपने जीवन का स्वर्णिम समय खो देता है. उसकी शिक्षा, करियर और भविष्य सब कुछ अंधकार में डूब जाता है. यही नहीं, लत पूरी न हो पाने पर वह चोरी, लूटपाट, मारपीट जैसे अपराधों की ओर बढ़ता है. ऐसे में समाज में असुरक्षा की भावना गहराती है और अपराध दर बढ़ती है. दरअसल, आज की सबसे बड़ी चिंता यह है कि नशे का कारोबार केवल गली-मोहल्लों तक सीमित नहीं रहा. यह अब संगठित अपराध का रूप ले चुका है. करोड़ों रुपये के मुनाफे वाला यह धंधा माफियाओं, दलालों और स्थानीय नेटवर्क के सहारे पनप रहा है. बिना संरक्षण और प्रभावशाली लोगों की शह के यह कारोबार लंबे समय तक चल ही नहीं सकता. इसका सीधा अर्थ है कि तस्करी के इस जाल को काटने के लिए केवल छोटे-मोटे तस्करों को पकडऩा पर्याप्त नहीं है. असली कार्रवाई उन लोगों पर होनी चाहिए जो इस कारोबार के पीछे की ताकत हैं.सरकार और प्रशासन के लिए अब यह वक्त निर्णायक कार्रवाई का है. जीरो टॉलरेंस की नीति केवल घोषणा तक सीमित नहीं रहनी चाहिए. पुलिस को तस्करों के नेटवर्क की आर्थिक कमर तोडऩी होगी. उनकी संपत्तियां जब्त कर उन्हें यह संदेश देना होगा कि नशे का कारोबार करने वालों के लिए मध्य प्रदेश की धरती सुरक्षित नहीं है. इसके साथ ही सीमावर्ती जिलों और शहरों की निगरानी बढ़ाई जानी चाहिए, क्योंकि नशे की खेप अक्सर बाहर से आती है. हालांकि केवल कानून से यह लड़ाई नहीं जीती जा सकती. समाज की भागीदारी इसमें उतनी ही आवश्यक है. परिवारों को अपने बच्चों पर नजर रखनी होगी, स्कूल-कॉलेजों में जागरूकता अभियान चलाना होगा और युवाओं को खेल व सकारात्मक गतिविधियों की ओर आकर्षित करना होगा. साथ ही, जो युवा नशे की गिरफ्त में आ चुके हैं, उनके लिए पुनर्वास केंद्रों की संख्या और गुणवत्ता दोनों बढ़ाने होंगे. उन्हें अपराधी मानने के बजाय पीडि़त मानकर समाज की मुख्य धारा में वापस लाना होगा.इंदौर प्रदेश की औद्योगिक राजधानी है. यहां से पूरे प्रदेश की छवि बनती है. अगर यही शहर नशे की गिरफ्त में आता है तो यह पूरे मध्य प्रदेश के लिए कलंक होगा. इसलिए आज जरूरत है सख्त फैसलों की, कठोर कार्रवाई की और सतत जागरूकता की. नशे का जहर केवल एक पीढ़ी को ही नहीं, बल्कि पूरे समाज के भविष्य को निगल सकता है. याद रखना होगा कि सुरक्षित और समृद्ध समाज की राह नशे की जकडऩ तोड़े बिना संभव नहीं.सरकार, पुलिस और समाज तीनों को मिलकर यह लड़ाई लडऩी होगी. यह केवल अपराध के खिलाफ जंग नहीं, बल्कि हमारे बच्चों और भविष्य को बचाने की लड़ाई है.

 

Next Post

अभिषेक बनर्जी ने कलकत्ता उच्च न्यायालय में चुनाव याचिका मामले में जवाबी हलफनामा दायर किया

Tue Aug 26 , 2025
कोलकाता (वार्ता) तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी ने 2024 के लोकसभा चुनावों में डायमंड हार्बर निर्वाचन क्षेत्र से अपनी जीत को चुनौती देने वाली चुनाव याचिका के खिलाफ सोमवार को कलकत्ता उच्च न्यायालय में जवाबी हलफनामा दायर किया। न्यायमूर्ति सुगातो मजूमदार की पीठ ने गत 19 अगस्त को श्री बनर्जी […]

You May Like