मतदाता सूची की शुद्धता, चुनाव पारदर्शिता पर आयोग की ओर से छह माह में दलों के साथ 4700 से अधिक बैठकें

नयी दिल्ली, 25 अगस्त (वार्ता) मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा (एसआईआर) को लेकर मचे शोर-शराबे के बीच चुनाव आयोग के अधिकारियों का कहना है कि सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने और चुनाव प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए पिछले छह महीने में सभी दलों के साथ संवाद की नयी व्यवस्था के साथ 28 ठोस कदम उठाए गए हैं जिससे बिहार में सूची की सफाई का काम सहज ढंग से चल रहा है ।

आयोग ने पिछले छह महीने से राजनीतिक दलों के साथ उप-मंडल, जिला, प्रदेश और राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक दलों के साथ व्यवस्थित बैठक का कार्यक्रम चलाया है। मार्च में सभी राज्यों में उप-मंडल पर मतदाता-पंजीयन अधिकारियों (ईआरओ) से लेकर राज्य स्तर पर मुख्य चुनाव अधिकारियों ने राजनीति दलों के साथ 4719 बैठकें आयोजित की । इनमें विभिन्न दलों के कुल 28,000 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इनमें 40 बैठकें मुख्य चुनाव अधिकारियों ने, 800 जिला निर्वाचन अधिकारियों और 3879 मतदाता पंजीयन ने ली थी।

राजनीतिक दलों के साथ आयोग की ओर से सुव्यवस्थित बैठकों की यह परंपरा मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और आयुक्त डॉ सुखबीर सिंह संधू और डॉ विवेक जोशी के नेतृत्व में शुरू की गयी है और इसकी जरूरत बहुत पहले से महसूस की जा रही थी। आयोग पहले भी राजनीतिक दलों के साथ बैठकें करता था लेकिन वे मुख्य रूप से राजनीति दलों की पहल पर ही हुआ करती थीं।

आयोग ने छह मान्यता प्राप्त राष्ट्रीय दलों के प्रमुखों को भी मई में अलग अलग यहां अपने मुख्यालय पर आमंत्रित किया जिसमें अब तक कांग्रेस को छोड़ कर सभी दलों के प्रमुखों के साथ बैठके हो चुकी हैं। कांग्रेस पार्टी को 15 मई को बैठक करने के लिए आमंत्रित किया गया था। आयोग के अनुसार पार्टी ने उसे टाल दिया था, और बाद में किसी और तिथि पर बैठक तय करने के लिए आयोग की ओर से भेजे गए पत्र का जवाब नहीं दिया। राष्ट्रीय दलों में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती आयोग में छह मई को आयी थीं। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अध्यक्ष जेपी नड्डा के साथ आठ मई को, मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के महासचिव एमए बेबी के साथ 10 मई को , नेशनल पीपुल्स पार्टी के कॉनराड के संगमा के साथ 13 मई को और आम आदमी पार्टी (आप) के प्रमुख अरविंद केजरीवाल के साथ 15 मई को बैठक हुई थी।

इसके बाद जुलाई अगस्त में 17 राज्य राज्यस्तरीय मान्यता प्राप्त पार्टियों के प्रमुखों के साथ बैठकें की गयीं। अन्य दलों के साथ बातचीत की प्रक्रिया चल रही है।

आयोग ने इस पहल को वर्तमान कायदे कानूनों के तहत चुनाव प्रक्रिया को और मजबूत बनाने की अपनी सोच के अनुरूप बताया है।

आयोग के एक अधिकारी ने कहा कि एसआईआर कार्यक्रम बिहार में नियम-कायदे के तहत सभी हितधारकों की भागीदारी के साथ चलाया जा रहा है और वहां जुलाई अगस्त में मतदाताओं के गणना-फर्मा जमा कराने में आम जनता और जमीनी स्तर पर सभी दलों के कार्यकर्ताओं ने पूरे उत्साह से भाग लिया है। आयोग के एक अधिकारी ने दावे और आपत्ति के दौर में राजनीति दलों के बूथ स्तरीय एजेंटों का हस्तक्षेप अब तक करीब-करीब शून्य रहने के सवाल पर कहा, ‘दावे या आपत्ति आप को अपने हस्ताक्षर के साथ एक निर्धारित प्रारूप में करना होता है। यह कानूनी जिम्मेदारी लेने का काम है, और यह ठोस आधार पर ही किया जा सकता है।”

बिहार में छह राष्ट्रीय और छह राज्य स्तरीय दलों ने करीब 1.61 लाख बूथ स्तरीय एजेंट नियुक्त किये हैं 1 दावे और आपत्ति के दौर में 1-25 अगस्त के दौरान मात्र एक दल- राज्य स्तरीय दल कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी-लेनिनिस्ट ) की ओर ऐ 10 दावे अथवा आपत्तियां मिली हैं।

आयोग द्वारा पिछले छह माह में उठाये गये नये कदमों में पूरे देश में मतदाता सूची की शुद्धता के लिए एसआईआर कार्यक्रम चलाना, बीएलओ और बीएल के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम , बीएलओ के लिए फोटो पहचान पत्र, पंजीकृत गैर मान्यता प्राप्त दलों की जांच कर उन्हें नोटिस जारी करने और पंजीकरण रद्द करने की कार्रवाई , निर्देशों और दिशानिर्देश के अनुसार चुनाव कार्य में लगे 28 हितधारक संगठनों की स्थिति का आकलन शामिल हैं। इनके अलावा मानक प्रक्रिया के तहत 5 प्रतिशत ईवीएम की जांच , 40 से अधिक ऐप को मिला कर ईसीआईनेट नाम के नये ऐप की शुरुआत, फार्म 17 और ईवीएम के आंकड़े में अंतर होने पर वीपीपैट की गणना अनिवार्य किये जाने, मतदान केंद्रों के बार पर मतदाता के लिए मोबाइल जमा कराने की सुविधा, एक बूथ पर अधिकतम 1200 मतदाता की सीमा और मतदाता सूचना पर्ची पर क्रम संख्या और भाग संख्या का साफ दिखने वाला मुद्रण जैसी पहल शामिल है।

आयोग के एक अधिकारी ने कहा, ‘इन पहलों के साथ साथ डिजिटल प्रौद्योगिकी के समावेश से एसआईआर के काम में काफी सुविधा हुई है। बीएलओ और बीएलए (राजनीति दलों के एजेंटो) के प्रशिक्षण से भी समन्वय बढ़ा है।” इस अधिकारी ने बिहार के कुछ जिलों के अनुभव के आधार पर कहा, ‘ दिल्ली या पटना में बैठक कर राजनीति के बारे में जो शोर सुनायी दे रहा है वह गलियों और गावों में नहीं दिता। गावों में अधिकतर बीएलए शिक्षक हैं जिन्हें प्राय: सभी लोग जानते हैं और वह सबको जानते हैं।’

 

Next Post

प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ संबंधों और विकास साझेदारी को मज़बूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है भारत: मुर्मु

Mon Aug 25 , 2025
नयी दिल्ली 25 अगस्त (वार्ता) राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा है कि भारत अपने विशेष भागीदार फिजी सहित सभी प्रशांत द्वीपीय देशों के साथ संबंधों और विकास साझेदारी को मज़बूत बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। भारत यात्रा पर आये फिजी के प्रधानमंत्री सिटिवेनी राबुका ने सोमवार को यहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र […]

You May Like