नयी दिल्ली, 25 अगस्त (वार्ता) उच्चतम न्यायालय ने भारतीय विदेश मंत्रालय को निर्देश दिया है कि वह गायब हुई एक रूसी महिला और उसके बच्चे का पता लगाने के लिए रूसी दूतावास को प्राथमिकी और संबंधित दस्तावेजों के साथ एक नया अनुरोध पत्र भेजे।
न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने रूस को भारत के साथ हस्ताक्षरित कानूनी सहायता संधि का उल्लेख करते हुए कहा कि रूसी दूतावास को अपने द्विपक्षीय दायित्वों की याद दिलानी चाहिए। इस संधि में कहा गया है कि दोनों पक्षों को आपराधिक मामलों में यथासंभव व्यापक कानूनी सहायता देनी चाहिए। न्यायालय ने अपर सॉलिसिटर जनरल (एएसजी) ऐश्वर्या भाटी से यह भी सुनिश्चित करने को कहा कि मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास राजनयिक माध्यमों का सक्रिय रूप से उपयोग करे।
विदित हो कि इस घटना में एक रूसी महिला अपने भारतीय पति के साथ चल रहे अपने पांच साल के बच्चे की कस्टडी विवाद के बीच कथित तौर पर बच्चे के साथ भारत से चली गई थी।
अदालत ने इस मामले में दिल्ली पुलिस के आचरण पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है। न्यायमूर्ति कांत ने टिप्पणी करते हुए कहा, “वे क्या कर रहे थे? यह आपराधिक लापरवाही है। पुलिस उपायुक्त और स्थानीय अधिकारी ज़िम्मेदार हैं और उन्हें बख्शा नहीं जा सकता।” अदालत ने कहा कि बच्चे को माता-पिता की हिरासत से नहीं, बल्कि न्यायालय की हिरासत से ले जाया गया, जिससे यह “घोर अवमानना” का मामला बन जाता है।
एएसजी ने न्यायालय को सूचित किया कि महिला के खिलाफ अपहरण, जालसाजी और आपराधिक साजिश के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई है, साथ ही 11अगस्त को एक इंटरपोल ब्लू कॉर्नर नोटिस भी जारी किया गया। उन्होंने आगे कहा कि विदेश मंत्रालय ने रूसी दूतावास को पत्र लिखा था, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ सकी। न्यायमूर्ति कांत ने टिप्पणी की, “यह ऐसा मामला नहीं है जिसे बलपूर्वक सुलझाया जा सके। इसके लिए कूटनीतिक तरीके से निपटने की आवश्यकता है। यदि आवश्यक हुआ, तो न्यायालय अधिकारियों के सामने आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए आगे के आदेश जारी करेगा।”
इस मामले में पांच साल का एक बच्चा अदालत के आदेश से माता-पिता दोनों की संयुक्त अभिरक्षा में था। उसकी रूसी माँ और भारतीय पिता उसके साथी बारी-बारी से दिन बिताते थे। गत 22 मई को, अदालत ने माँ को सप्ताह में तीन दिन अभिरक्षा में रखने की अनुमति दी। लेकिन सात जुलाई को, महिला और बच्चा लापता हो गए। आरोप है कि मां, बच्चे को लेकर रूस चली गई और लुकआउट सर्कुलर और देशव्यापी अलर्ट के बावजूद, बच्चे और मां का पता नहीं चल सका।
न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि भारत बच्चे की रिहाई और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सभी कानूनी और कूटनीतिक रास्ते अपनाएगा।
