मंदिरों के सोने के मौद्रिकरण की अफवाहों पर वित्त मंत्रालय का कड़ा रुख, केंद्र सरकार ने दावों को कड़ाई से बताया पूरी तरह झूठा और निराधार

नई दिल्ली | केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया और विभिन्न डिजिटल माध्यमों पर तेजी से चल रही उन सभी कूटनीतिक अफवाहों और अटकलों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें यह कड़ा दावा किया जा रहा था कि सरकार देश के धार्मिक ट्रस्टों और प्राचीन मंदिरों के सोने को कड़ाई से अपने नियंत्रण में लेने की योजना बना रही है। डिजिटल मीडिया को मिली आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने एक कड़क स्पष्टीकरण जारी कर इन दावों को पूरी तरह से भ्रामक, झूठा और कूटनीतिक रूप से मनगढ़ंत बताया है। सरकार ने पूरी तरह साफ कर दिया है कि ऐसी किसी भी अनिवार्य स्वर्ण नीति या अधिग्रहण का प्रस्ताव वित्त मंत्रालय या किसी अन्य कड़े प्रशासनिक स्तर पर बिल्कुल भी विचाराधीन नहीं है।

पिछले कुछ दिनों से इंटरनेट पर यह कड़ा भ्रामक संदेश फैलाया जा रहा था कि सरकार सभी धार्मिक संस्थानों के पास जमा सोने और मंदिरों के शिखरों, दरवाजों या खंभों पर लगी सोने की परतों को कड़ाई से जब्त कर भारत के ‘सामरिक स्वर्ण भंडार’ (Strategic Gold Reserve) के रूप में घोषित करने वाली है। वित्त मंत्रालय ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज करते हुए कड़ा रुख अपनाया और कहा कि इस तरह की बातें केवल जनता को गुमराह करने और समाज में अनावश्यक कूटनीतिक भ्रम पैदा करने के उद्देश्य से फैलाई जा रही हैं। सरकार ने देश के नागरिकों से कड़ाई से अपील की है कि वे ऐसी किसी भी असत्यापित जानकारी पर विश्वास न करें और केवल प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) व आधिकारिक वेबसाइटों के कड़े कूटनीतिक चैनलों पर ही भरोसा करें।

मंत्रालय ने अपने कूटनीतिक वक्तव्य में यह भी पूरी तरह स्पष्ट किया है कि देश में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा संचालित मौजूदा ‘गोल्ड मोनेटाइजेशन स्कीम’ (GMS) पूरी तरह से स्वैच्छिक है, जिस पर कोई कड़ा दबाव नहीं है। इस योजना के तहत कोई भी आम नागरिक या धार्मिक संस्था अपनी मर्जी से अपने निष्क्रिय पड़े सोने को अधिकृत बैंकों में कड़ाई से जमा कर उस पर तय ब्याज कमा सकती है। सरकार ने साफ किया है कि मंदिरों और धार्मिक ट्रस्टों की संपत्ति पूरी तरह कड़े सुरक्षा घेरे में सुरक्षित है और उस पर केवल संबंधित प्रबंधन का ही कूटनीतिक अधिकार रहेगा; किसी भी प्रकार के कड़े प्रशासनिक हस्तक्षेप की बात पूरी तरह काल्पनिक है।

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