गैरसैंण | उत्तराखंड विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कांग्रेस पर तीखा प्रहार करते हुए अवैध मदरसों पर की गई कार्रवाई का बचाव किया। सीएम धामी ने कहा कि कांग्रेस ने दशकों तक अल्पसंख्यकों को केवल ‘वोट बैंक’ और ‘टूलकिट’ की तरह इस्तेमाल किया, जबकि उनकी सरकार चाहती है कि अल्पसंख्यक युवाओं के हाथ में अच्छी किताबें हों। उन्होंने आरोप लगाया कि 2016 के मदरसा अधिनियम के जरिए कांग्रेस ने केवल एक विशेष वर्ग को लाभ पहुँचाया और सिख, ईसाई, बौद्ध तथा जैन जैसे अन्य अल्पसंख्यकों की अनदेखी की। धामी सरकार ने नए कानून के तहत अब सभी अल्पसंख्यक समुदायों को समान अधिकार देने का काम किया है।
मुख्यमंत्री ने आक्रामक रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया कि सरकार को किसी शब्द से नहीं, बल्कि राष्ट्र विरोधी मानसिकता से परेशानी है। उन्होंने सदन में गरजते हुए कहा, “यदि किसी मदरसे की आड़ में आतंक की फैक्ट्री चलाई जाएगी या शिक्षा के नाम पर देश विरोधी गतिविधियां सिखाई जाएंगी, तो हम उसे कतई पनपने नहीं देंगे।” सीएम ने साफ किया कि देवभूमि की पवित्रता को कलंकित करने वाले तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि तुष्टीकरण की राजनीति ने उत्तराखंड की जो छवि बिगाड़ी थी, उनकी सरकार उस ‘कलंक’ को पूरी तरह मिटाने के लिए संकल्पबद्ध है।
प्रदेश की जनसांख्यिकी और सुरक्षा पर चर्चा करते हुए सीएम धामी ने सख्त भू-कानून और ‘ऑपरेशन कालनेमि’ का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बाहरी राज्यों से आकर पहचान छिपाकर जमीनें खरीदने वाले और जिहादी मानसिकता के साथ सनातन धर्म की यात्राओं को प्रभावित करने वालों को देवभूमि में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सीएम ने चेतावनी दी कि नाम और वेश बदलकर ठगी करने वाले ‘विधर्मियों और घुसपैठियों’ को वापस वहीं भेज दिया जाएगा जहाँ से वे आए हैं। सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाना है और इसके लिए मातृशक्ति के सशक्तिकरण और इकोलॉजी-इकोनॉमी के बीच संतुलन बनाना उनकी प्राथमिकता है।

