इंदौर: शहर की विश्व प्रसिद्ध सराफा चौपाटी इन दिनों विवादों में है. सोना-चांदी व्यापारियों का कहना है कि पारंपरिक खानपान की दुकानों के साथ अब अस्थायी ठेले-गुमटी की संख्या बढ़कर 250 से अधिक हो गई है, जिनमें मोमोज, मंचूरियन, डोसा और विदेशी फास्ट फूड बिक रहा है. इसके चलते असामाजिक तत्वों की आवाजाही बढ़ने से सुरक्षा पर खतरा मंडरा रहा है.
व्यापारियों का कहना है कि सराफा बाजार सामान्यतः रात 8 बजे बंद हो जाता है, जबकि शहर के अन्य क्षेत्रों में ज्वेलरी दुकानें रात 10 बजे तक खुली रहती हैं. प्रतिस्पर्धा और त्योहारों के मौसम को देखते हुए व्यापारी भी रात 10 बजे तक दुकानें खोलना चाहते हैं, लेकिन चौपाटी के कारण माहौल बिगड़ रहा है.सराफा एसोसिएशन ने 1 सितंबर से चौपाटी नहीं लगने देने का निर्णय लिया है और विधायक मालिनी गौड़ तथा महापौर पुष्यमित्र भार्गव को ज्ञापन सौंपा है.
एसोसिएशन पदाधिकारियों का कहना है कि चौपाटी अब अपनी परंपरागत पहचान खो चुकी है और इसका स्वरूप बदल जाने से व्यापारियों की सुरक्षा और प्रतिष्ठा पर संकट खड़ा हो गया है.गौरतलब है कि सराफा चौपाटी 125 साल पुरानी है और इंदौर की पहचान मानी जाती है. रात में यहां लगने वाली यह खानपान चौपाटी देश-विदेश तक प्रसिद्ध है.
