हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान मामले में दिये निर्देश
जबलपुर: मप्र हाईकोर्ट द्वारा स्वत: संज्ञान लेकर सहकारिता विभाग के कर्मचारियों के विरुद्ध अवमानना प्रकरण शुरू करने के बाद सेवानिवृत्त कर्मचारी को न्याय मिल गया। इसके अंतर्गत याचिकाकर्ता को सेवानिवृत्ति के 15 वर्ष बाद पदोन्नति और उससे जुड़े सेवानिवृत्त लाभ मिल गए। जस्टिस विशाल मिश्रा की एकलपीठ ने सहकारिता विभाग के अधिकारियों की गलती को आड़े हाथों लेकर दस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
याचिकाकर्ता रीवा निवासी विष्णु प्रसाद मिश्रा की ओर से अधिवक्ता नीरज सिंह ने पक्ष रखा। जिन्होंने बताया कि याचिकाकर्ता सहकारिता निरीक्षक के पद पर पदस्थ था। वर्ष 2010 में विभागीय पदोन्नति समिति की बैठक हुई, लेकिन पदोन्नति का दावा निरस्त कर दिया गया। वर्ष 2013 में हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई। न्यायालय ने रिव्यू डीपीसी का आदेश दिया। इसके बावजूद विभाग द्वारा प्रमोशन नहीं दिया गया।
जिस पर हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर अवमानना की कार्रवाई शुरू की। हाईकोर्ट ने सहकारिता आयुक्त को उपस्थित होने कहा। आयुक्त ने हाजिर होकर क्षमा याचना की। इसके बाद विभाग ने सात मार्च 2025 को आदेश जारी कर याचिकाकर्ता को अंकेक्षण अधिकारी के पद पर पदोन्नति दे दी गई। हाईकोर्ट ने पाया कि विभाग की गलती की वजह से याचिकाकर्ता को दो बार हाईकोर्ट में याचिका दायर करनी पड़ी। इसके अलावा कोर्ट ने भी अवमानना कार्रवाई शुरू की, जिसे गंभीरता से लेते हुए न्यायालय ने विभाग के दोषी अधिकारियों पर उक्त कॉस्ट लगाई।
