सीधी: नगर पालिका परिषद सीधी में उपाध्यक्ष कक्ष विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। शुक्रवार को उच्च न्यायालय जबलपुर की डबल बेंच ने सुनवाई के दौरान नगर पालिका अधिवक्ता से कठोर सवाल पूछे, जिससे अध्यक्ष काजल वर्मा की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। न्यायाधीश ने स्पष्ट कहा कि यदि नियमों में उपाध्यक्ष को कक्ष देने का प्रावधान नहीं है तो अध्यक्ष को भी कक्ष देने का प्रावधान नहीं है। ऐसे में अध्यक्ष को भी खड़े होकर काम करना होगा या फिर यह स्पष्ट किया जाए कि उपाध्यक्ष का कक्ष क्यों खाली कराया गया।
दरअसल, 24 फरवरी 2025 को उपाध्यक्ष दान बहादुर सिंह चौहान का कक्ष क्रमांक 26 अध्यक्ष और पार्षदों की मौजूदगी में ताला तोड़कर खाली करा दिया गया था। उपाध्यक्ष ने इस पर आपत्ति जताते हुए उच्च न्यायालय, सीएमओ और कोतवाली पुलिस को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की थी। इसी मामले में 22 अप्रैल 2025 को हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि प्रशासनिक निर्णय में हस्तक्षेप संभव नहीं, लेकिन सीएमओ को उपाध्यक्ष के लिए सुविधाजनक कार्यव्यवस्था करनी होगी। इसके बावजूद अब तक व्यवस्था नहीं बनाई गई।
इस प्रकरण की सुनवाई का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने से जिले की राजनीति में हलचल मच गई है। अब सबकी निगाहें 8 सितंबर पर टिकी हैं, जब उच्च न्यायालय यह तय करेगा कि उपाध्यक्ष को उनका कक्ष वापस मिलेगा या अध्यक्ष को भी अपना कक्ष खाली करना पड़ेगा।
