ग्वालियर चंबल डायरी
हरीश दुबे
राहुल गांधी ने दिल्ली में वोट चोरी का मुद्दा जोर शोर से उठाया तो चंबल भी गरमा गया। सिंधिया के गृहक्षेत्र में इस मुद्दे पर आंदोलन को धार देने की कमान खुद जीतू पटवारी ने संभाल ली है। वे 27 अगस्त को भिंड आ रहे हैं और यहां एक मैरिज गार्डन में “वोट चोर गद्दी छोड़” सम्मेलन को संबोधित करेंगे। पहली बार भिंड में पार्टी ने दो जिलाध्यक्ष बनाए हैं। भिंड जिले में विधानसभा चुनाव में कांग्रेस तीन सीटें हार गई थी जिनमें पैंतीस साल से पार्टी का अभेद्य दुर्ग रही लहार सीट भी शामिल थी। यही वजह है कि देहात की चार सीटों के लिए रामशीष बघेल को सदारत सौंपी गई है जबकि शहर की जिम्मेदारी पिंकी भदौरिया संभालेंगे।
उधर ग्वालियर दक्षिण सीट पर सिर्फ ढाई हजार वोट से हारे प्रवीण पाठक ने भी अपनी हार की वजह वोटचोरी को बताते हुए खुलाशा किया है कि उन्हें चुनाव हराने के लिए चुनाव से सिर्फ दो महीने पहले दक्षिण की मतदाता सूची में सवा आठ हजार वोट गुपचुप ढंग से जोड़ दिए गए और वोटों की यह घटबढ़ उनकी पार्टी से छिपाई गई। अपने नेता राहुल के सुर में ताल मिलाते हुए प्रवीण पाठक ने वोट चोरी को आजादी के बाद से अब तक का सबसे बड़ा वोट घोटाला करार देते हुए इस मुद्दे पर कोर्ट जाने का भी ऐलान कर दिया है।
सिफारिशों के बोझ तले दबे अध्यक्षजी की मजबूरी बनी जंबो कार्यकारिणी
ग्वालियर कांग्रेस में नए अध्यक्ष की नई कार्यकारिणी में जगह बनाने के लिए कार्यकर्ताओं ने जोड़तोड़ के साथ छत्रपों की गणेश परिक्रमा शुरू कर दी है। शहर कांग्रेस में जिलाध्यक्ष के बाद संगठन प्रभारी का पद ही खास माना जाता है, लिहाजा संगठन प्रभारी बनने और बनाने के लिए सबसे ज्यादा सिफारिशें लगाई गई हैं। अब तक ग्वालियर दक्षिण में संगठन प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे नेताजी की नजर जिले पर लगी है, इसके लिए बड़े नेताओं से भी ताकत लगवाई गई है। भूतपूर्व हो चुके पंडितजी ने जंबो कार्यकारिणी बनाई थी, हालांकि इसमें उनके लोग कम थे, पार्टी पर प्रभाव रखने वाले दीगर नेताओं द्वारा सौंपी गई सूचियों से लिए नाम ज्यादा थे। लिहाजा निगम चुनाव से डेढ़ साल पहले सभी को संतुष्ट करने के लिए विशाल आकार वाली कार्यकारिणी बनाना नए अध्यक्ष की भी मजबूरी होगी।
पुण्य बटोरने के साथ सियासी रसूख दिखाने की तैयारी
कैबिनेट मंत्री राकेश शुक्ला इन दिनों कुछ ज्यादा ही धार्मिक हो गए हैं। कई बार विधायक रहने और बीच में कुछ साल सियासत के हाशिए पर रहने के बाद 23 में पहली बार मंत्री बने शुक्ला यूं तो कथा, पुराण कराते ही रहे हैं लेकिन अब पितृपक्ष में वे वृंदावन धाम में श्रीमद्भागवत करा रहे हैं। धर्म कर्म का पुण्य बटोरने के साथ राजनीतिक रसूख दिखाने की भी तैयारी है। दिल्ली और भोपाल के बड़े नेताओं से खुद मुलाकात कर कथा का निमंत्रण दे रहे हैं। अभी तक गड़करी, सिंधिया और शिवराज को न्योत चुके हैं। फेहरिस्त अभी लंबी है।
अपना अध्यक्ष बनवाने चेंबर चुनाव में कूदेंगे राजनीति के धुरंधर
इलाके के व्यापारियों और उद्यमियों की सबसे पुरानी और सबसे बड़ी संस्था चैंबर ऑफ कॉमर्स के चुनाव पहली बार अंचल के परस्पर प्रतिद्वंदी नेताओं की गोलबंदी में फंसते दिख रहे हैं। अध्यक्ष पद पर ताल ठोकने की तैयारी कर चुके मुरार के पारस जैन को जहां नरेंद्र सिंह तोमर का समर्थन है वहीं मौजूदा अध्यक्ष डॉ. प्रवीण अग्रवाल सिंधिया खेमे से माने जा रहे हैं। खास बात यह कि पारस और प्रवीण, दोनों ही व्हाइट हाउस के चेहरे हैं और चुनाव में व्हाइट हाउस एक ही प्रत्याशी उतारेगा। देखना है कि प्रत्याशी चयन में नरेंद्र सिंह का दबदबा रहता है या फिर सिंधिया का…!
नाराजगी के डर से रोककर रखी सूची
प्राधिकरण, निगम, बोर्ड के अध्यक्षों की सूची सीएम के पास तैयार रखी है, नए सूबा सदर के संज्ञान में भी है लेकिन पार्टी में नाराजगी के भय से सूची को रोककर रखा गया है। सबसे ज्यादा समस्या सिंधिया समर्थकों को एडजस्ट करने में आ रही है। महल ने ग्वालियर के तीन प्राधिकरणों में से दो प्राधिकरणों पर उन नेताओं के नाम दिए हैं जिन्होंने सिंधिया के संग पांच साल पहले भगवा पहना था।
