जम्मू-कश्मीर सर्वदलीय बैठक में पहलगाम हमले के मद्देनजर केंद्र सरकार के कदमों का समर्थन करने का प्रस्ताव

श्रीनगर, 24 अप्रैल (वार्ता) जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में दो दिन पहले हुए आतंकवादी हमले पर चर्चा के लिए गुरुवार को आयोजित सर्वदलीय बैठक में अपराधियों को न्याय के कठघरे में लाने के प्रयासों के लिए पूर्ण समर्थन का संकल्प लिया गया और हमले के बाद केंद्र सरकार की ओर से घोषित कदमों के प्रति अपना समर्थन जताया गया।

बैठक के बाद अपनाये गये प्रस्ताव में कहा गया, “हम इन अपराधियों को न्याय के कठघरे में लाने के सभी प्रयासों का समर्थन करने की अपनी प्रतिबद्धता में अडिग हैं। ऐसा करते हुए, हम पुष्टि करते हैं कि कोई भी आतंकवादी गतिविधि हमारे संकल्प को कमजोर नहीं कर सकती या हमारी अदम्य भावना को खत्म नहीं कर सकती।”

जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की ओर से बुलायी गयी बैठक में नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (डीपीएपी) के प्रमुख गुलाम नबी आजाद, जम्मू-कश्मीर कांग्रेस के प्रमुख तारिक हमीद कर्रा, पीपुल्स कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष सज्जाद लोन और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के महबूब बेग सहित शीर्ष नेताओं ने भाग लिया।

प्रस्ताव में सामूहिक संयम का आह्वान किया गया तथा समाज के सभी वर्गों, जिनमें सामुदायिक नेता, धार्मिक संस्थान, युवा समूह, नागरिक समाज और मीडिया शामिल हैं, से शांति और सद्भाव को बाधित करने के उद्देश्य से किये जा रहे उकसावे का विरोध करने का आग्रह किया गया। प्रस्ताव में कहा गया, “हम कल केंद्र सरकार द्वारा उठाए गए कदमों का भी समर्थन करते हैं।”

प्रतिभागियों ने पहलगाम में हुए जघन्य, अमानवीय हमले की कड़े शब्दों में निंदा की, जिसमें निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाया गया और उनकी हत्या की गयी। उन्होंने कहा, “शांतिपूर्ण नागरिकों के खिलाफ क्रूरता के ऐसे कायरतापूर्ण कृत्यों का समाज में कोई स्थान नहीं है और यह कश्मीरियत के मूल्यों और भारत के विचार पर सीधा हमला है, जो लंबे समय से इस क्षेत्र में एकता, शांति और सद्भाव का प्रतीक रहे हैं। हम उन परिवारों के प्रति अपनी गहरी संवेदना व्यक्त करते हैं, जिन्होंने नुकसान उठाया है। हम आपके दुख में शामिल हैं और इस अपार दुख की घड़ी में आपके साथ खड़े हैं।”

बैठक में सैयद आदिल हुसैन शाह को भी श्रद्धांजलि दी गयी, जो अपने घोड़े पर पर्यटकों को पहलगाम ले गये थे और पर्यटकों को बचाने के लिए आतंकवादियों में से एक से लड़ने के प्रयास में मारे गये।

प्रस्ताव में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों से इन कठिन समय में घर से दूर रहने वाले कश्मीरी छात्रों और नागरिकों की सुरक्षा के लिए अटूट प्रतिबद्धता के साथ आगे आने की अपील की गयी है। प्रस्ताव में कहा गया है कि इन व्यक्तियों को, चाहे वे जम्मू-कश्मीर से बाहर यात्रा कर रहे हों या रह रहे हों, किसी भी तरह के उत्पीड़न, भेदभाव या धमकी से बचाया जाना चाहिए।

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