
सीतामऊ। वर्षा की कमी से उत्पन्न हालात को देखते हुए नगर में परंपरागत उजमानी पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। सुबह से ही बाजार बंद रहे और कस्बे में सन्नाटा छा गया।
लोग परिवार, मित्रमंडल और समाज के समूहों के साथ आसपास के जंगलों में पहुंचे, जहां दाल-बाटी चूरमा का भोग बनाकर इंद्रदेव को अर्पित किया गया। मंदिरों में भजन-कीर्तन, पूजा-पाठ और प्रार्थना हुई, वहीं मस्जिदों में भी सामूहिक दुआएं मांगी गईं।
सामूहिक आस्था का असर यह रहा कि दिनभर रिमझिम फुहारें पड़ती रहीं। किसानों ने इसे शुभ संकेत मानते हुए राहत की सांस ली। उनका कहना है कि अच्छी बरसात से न केवल फसलें लहलहाती हैं बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति भी सुधरती है और बाजारों में रौनक लौट आती है।
