रायसेन: किसानों की सुरक्षा के लिए शुरू की गई प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अब उम्मीद से ज्यादा निराशा का कारण बन रही है। जिले के ढाई लाख पंजीकृत किसानों ने बीते तीन वर्षों में करोड़ों रुपये का प्रीमियम जमा किया, लेकिन अधिकांश किसानों को लाभ नहीं मिल पाया। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2023 की रबी और 2024 की रबी व खरीफ सीजन के लिए किसानों को केवल 8.65 करोड़ रुपये की बीमा राशि दी गई, जबकि किसानों ने 670 करोड़ से अधिक का बीमा कवर कराया था।
किसानों और संगठनों का आरोप है कि योजना में पारदर्शिता नहीं है। नुकसान होने पर न तो समय पर सर्वे होता है और न ही बीमा कंपनियां दावे स्वीकार करती हैं। कई किसानों ने बताया कि लगातार तीन साल से फसलों को ओलावृष्टि, अतिवृष्टि और सूखे से नुकसान हुआ, लेकिन बीमा राशि नहीं मिली। भारतीय किसान संगठन के नेताओं का कहना है कि जब खेतों में नुकसान होता है तब न जनप्रतिनिधि पहुंचते हैं और न ही विभागीय अधिकारी। किसान शिकायतें सीएम हेल्पलाइन तक दर्ज करा चुके हैं, पर कोई सुनवाई नहीं हुई।किसानों का दर्द यही है कि वे हर सीजन प्रीमियम भरते हैं, पर बदले में उन्हें सिर्फ आश्वासन मिलता है। यही कारण है कि यह योजना किसानों के लिए राहत के बजाय बोझ बनती जा रही है।
इनका कहना है
किसानों को फसल बीमा वितरित की गई है वह ऊँट के मुंह में जीरा के समान है।फसल बीमा कंपनी, बैंक और कृषि विभाग के अधिकारी अपना मत स्पष्ट करें।फसल बीमा प्रीमियम के नाम पर जिले के किसान खुद को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।
इरफान जाफरी किसान जागृति संगठन प्रमुख रायसेन
जिले के करीब ढाई लाख किसानों को 8 करोड़ 65 लाख की बीमा योजना का फायदा दिया गया है।क्योंकि फसल बीमा क्षतिपूर्ति का आंकलन कृषि विभाग और राजस्व विभाग की रिपोर्ट के अलावा बीमा कंपनी द्वारा रिमोट सेंसिंग सर्वे के आधार पर होता है।जिसमें उपज के आधार पर तय होती है।
केपी भगत उप संचालक कृषि अधिकारी रायसेन
