इंदौर: आवारा श्वानों की बढ़ती तादाद पर आज तक लगाम नहीं लग पाई. साथ ही आवारा श्वानों के काटने के मामले अब और भी ज्यादा गंभीर हो चुके हैं. बात एक क्षेत्र की नहीं है बल्कि पूरे शहरभर के प्रत्येक मध्यवर्गीय एवं मजदूर वर्ग क्षेत्र जिनमें खजराना, आजाद नगर, मूसाखेड़ी, मालवा मिल, परदेसीपुरा, लाल गली क्षेत्र, भागीरथपुरा, लसूडिया मोरी, पालदा, चितावाद, महू नाका क्षेत्र के इंदिरा समाजवादी नगर, बालदा कॉलोनी, बड़ा गणपति में खारचा, गौरी नगर जैसे सैकड़ों कॉलोनियां शामिल है.
जहां आवारा श्वानों की तादाद में बड़ा इजाफा देखा गया है. कुछ निगम अधिकारी अपने बचाव के लिए यह कहते हुए दिखाई देते हैं कि घर के आसपास छोटे-बड़े गांव से आवारा श्वानों की टोली शहर भर में आकर फैल चुकी है. उधर, सरकारी लाल अस्पताल के रेबी•ा विभाग के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो पिछले कुछ महीनों से आवारा श्वानों के काटने के प्रकरण बढ़े हैं, इसके कारण रेबीज का खतरा भी बढ़ रहा है और इसके मरीजों की संख्या भी बढ़ी है. इन आंकड़ों में बढ़ोतरी होने के बावजूद ऐसे गंभीर मामलों को नजरअंदाज किया जा रहा है.
इनका कहना है
फिलहाल नगर निगम स्वच्छता पर ध्यान दे रहा हैं क्योंकि उससे अवार्ड मिलता है. अब आवारा श्वानों पर अंकुश लगाने पर अवार्ड तो नहीं मिल पाएगा ना, जनता की फिक्र नहीं है.
– राजेश शर्मा
आवारा श्वानों की तादाद पर कंट्रोल करने के लिए कई सालों से योजना के तहत नसबंदी की जाती हैं लेकिन लगता है इसमें भी विभाग द्वारा बहुत बड़ा भ्रष्टाचार हुआ ही होगा.
– जावेद खान
डॉग बाइट की घटनाएं बढ़ रही है. हम स्वच्छता में नंबर वन हैं. शहर के आवारा पशुओं को सही स्थान मिल चुका है फिर इन आवर श्वानों पर काबू क्यों नहीं पा रहे.
– पंकज कुशवाहा
