जेल से सरकार चलाने वाले, कुर्सी का मोह न छोड़ पाने वाले ही विधेयक के खिलाफ: अमित शाह

नयी दिल्ली, 20 अगस्त (वार्ता) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ‘जेल जाने पर कुर्सी गवाने’ के प्रावधान वाले संविधान संशोधन विधेयक का विरोध करने पर विपक्ष को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि जेल से सरकारें चलाने और कुर्सी का मोह न छोड़ पाने वाले ही इसके खिलाफ है।

श्री शाह ने कहा कि एक ओर प्रधानमंत्री नेरन्द्र मोदी इस विधेयक के माध्यम से स्वयं को कानून के दायरे में लाये हैं, दूसरी ओर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी ने ऐसा कानून बनाया था कि प्रधानमंत्री के विरुद्ध कोई भी कानूनी कार्रवाई नहीं हो सके। उन्होंने लोक सभा में विपक्षी सदस्यों के विरोध के तरीके को भद्दा बताते हुए कहा कि आज विपक्ष जनता के बीच पूरी तरह से बेनकाब हुआ है।

गृहमंत्री ने 130वें संविधान संशोधन विधेयक और उससे संबंधित दो अन्य विधेयकों को लोक सभा द्वारा विपक्ष के भारी हंगामे के बीच संयुक्त संसदीय समिति को भेजे जाने के बाद सोशल मीडिया एक्स पर ये बातें कहीं। उन्होंने लिखा, ‘‘ एक ओर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने अपने आप को कानून के दायरे में लाने का संविधान संशोधन पेश किया है और दूसरी ओर कानून के दायरे से बाहर रहने, जेल से सरकारें चलाने और कुर्सी का मोह न छोड़ने के लिए काँग्रेस के नेतृत्व में पूरे विपक्ष ने इसका विरोध किया है।”

उन्होंने कहा कि देश को वह समय भी याद है, जब इसी महान सदन में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने संविधान संशोधन संख्या-39 से प्रधानमंत्री को ऐसा विशेषाधिकार दिया कि प्रधानमंत्री के विरुद्ध कोई भी कानूनी कार्यवाही नहीं हो सकती थी।

उन्होंने कहा, “एक तरफ यह कांग्रेस की कार्य संस्कृति और उनकी नीति है कि वे प्रधानमंत्री को संविधान संशोधन करके कानून से ऊपर करते हैं। जबकि, दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी की नीति है कि हम हमारी सरकार के प्रधानमंत्री, मंत्री, मुख्यमंत्रियों को ही कानून के दायरे में ला रहे हैं।”

गृहमंत्री ने कहा कि देश में राजनीतिक भ्रष्टाचार के विरुद्ध मोदी सरकार की प्रतिबद्धता और जनता के आक्रोश को देख कर आज उन्होंने संसद में लोकसभा अध्यक्ष की सहमति से संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश किया, जिससे महत्त्वपूर्ण संवैधानिक पद, जैसे प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री, केंद्र और राज्य सरकार के मंत्री जेल में रहते हुए सरकार न चला पाएँ।

उन्होंने कहा कि इन विधेयकों का उद्देश्य सार्वजनिक जीवन में गिरते जा रहे नैतिकता के स्तर को ऊपर उठाना और राजनीति में शुचिता लाना है ।

श्री शाह ने कहा कि आज सदन में कांग्रेस के एक नेता ने उनके बारे में व्यक्तिगत टिप्पणी कि जब मुझे गिरफ़्तार कराया गया था तब मैंने इस्तीफा नहीं दिया। श्री शाह ने कहा कि कांग्रेस ने उन्हें उस समय फर्जी केस में फंसाया गया था और गिरफ्तारी से पहले उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।

गृहमंत्री ने कहा, “मैं कांग्रेस को याद दिलाना चाहता हूँ कि मैंने गिरफ्तार होने से पहले ही इस्तीफा दे दिया था और जमानत पर बाहर आने के बाद भी, जब तक मैं अदालत से पूरी तरह निर्दोष साबित नहीं हुआ, तब तक मैंने कोई संवैधानिक पद नहीं लिया था।”

उन्होंने कहा कि उनके ऊपर लगाए गए फर्जी मुकदमे को अदालत ने यह कहते हुए ख़ारिज किया कि मामला राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित है। गृहमंत्री ने भाजपा के नेता लाल कृष्ण आडवाणी के विरुद्ध आरोप लगने पर संसद से इस्तीफा दे दिया था।

श्री शाह ने कहा कि भाजपा और राजग हमेशा से सार्वजनिक जीवन में नैतिक मूल्यों के पक्षधर रहे हैं दूसरी ओर “ श्रीमती इंदिरा गांधी जी द्वारा शुरू की गई अनैतिक परंपरा को काँग्रेस पार्टी आज भी आगे बढ़ा रही है।”

उन्होंने कहा कि लालू प्रसाद यादव को बचाने के लिए कांग्रेस पार्टी एक अध्यादेश लायी थी, जिसका उस समय श्री गांधी ने विरोध किया था, आज वही श्री गांधी पटना के गांधी मैदान में लालू जी को गले लगा रहे हैं। विपक्ष का यह दोहरा चरित्र जनता भली-भांति समझ चुकी है।

उन्होंने कहा, “विधेयक समीक्षा के लिए संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के समक्ष रखा जाएगा, जहाँ इस पर गहन चर्चा होगी, फिर भी सभी प्रकार की शर्म और हया छोड़कर, भ्रष्टाचारियों को बचाने के लिए, काँग्रेस के नेतृत्व में पूरा इंडिया गठबंधन एकत्रित होकर इसका भद्दे व्यवहार से विरोध कर रहा था।”

श्री शाह ने विधेयक के प्रावधानों के बारे में कहा कि कोई भी व्यक्ति गिरफ्तार होकर जेल से प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री , केन्द्र या राज्य सरकार के मंत्री के रूप में शासन नहीं चला सकता है। उन्होंने कहा कि संविधान जब बना, तब हमारे संविधान निर्माताओं ने यह कल्पना भी नहीं की थी कि भविष्य में ऐसे राजनीतिक व्यक्ति भी आएँगे, जो हिरासत में लिये जाने से पहले नैतिक मूल्यों पर इस्तीफा नहीं देंगे।

विगत कुछ वर्षों में, देश में ऐसी आश्चर्यजनक स्थिति उत्पन्न हुई कि मुख्यमंत्री या मंत्री बिना इस्तीफा दिए जेल से अनैतिक रूप से सरकार चलाते रहे।उन्होंने कहा, “अब देश की जनता को यह तय करना पड़ेगा कि क्या जेल में रहकर किसी मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री द्वारा सरकार चलाना उचित है?”

 

 

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