शिवपुरी: शिवपुरी जिले के ग्राम खांदी में एक मासूम बच्ची दिव्यांशी पुत्री लाखन धाकड़ उम्र 1 साल तीन माह का उसके स्वजनों ने महज इसलिए इलाज नहीं कराया क्योंकि वह लड़की थी। परिणाम स्वरूप वह बीमार होकर कुपोषण का शिकार हो गई। दिव्यांशी ने जिला अस्पताल में दम तोड़ दिया। इस पूरे मामले में सीएमएचओ का कहना है कि बच्ची को 1 अगस्त को दस्तक अभियान के तहत चिंहित किया गया। स्वजनों को इस बात के लिए समझाया गया कि वह बच्ची को उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवा दें, लेकिन उसके परिवार वाले उसे अस्पताल में भर्ती करवाने तैयार नहीं हुए।
इसके बाद सरपंच से संपर्क कर मोहल्ले, पड़ौस के लोगों की पंचायत बुलवा कर दिव्यांशी के स्वजनों को समझाइश दी गई। इसके बाद उसे उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया, लेकिन इसके बावजूद उसके परिवार वाले उसे अस्पताल से लेकर घर भाग गए। आज बच्ची को जिला अस्पताल लेकर आए, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी।
पांच महीने से अपने मायके में बिहार थी मां सीएमएचओ डा संजय ऋषिश्वर के अनुसार बच्ची की मां खुशबू उसे लेकर पांच माह पहले अपने मायके चली गई थी। वहां से लौट कर आई तो एक अगस्त को बच्ची को चिंहित किया गया। 4 अगस्त को उसे सतनवाड़ा स्वास्थ्य केंद्र भर्ती कराया गया। 5 अगस्त को सतनवाड़ा स्वास्थ्य केंद्र से बच्ची किो जिला अस्पताल रैफर किया गया। यहां पीआईसीयू वार्ड में उसका उपचार चला। 5 अगस्त को ही बच्चे को मेडिकल कालेज रैफर कर दिया गया। वहां 7 अगस्त तक तक बच्ची का उपचार चला और हालत स्थिर हो गई। मेडिकल कालेज से बच्ची को एनआरसी ले जाने की सलाह देकर डिस्चार्ज किया गया, लेकिन दिव्यांशी के स्वजन उसे एनआरसी ले जाने की बजाय वापस गांव ले गए। वहां बच्ची की तबीयत फिर से खराब हो गई।
