सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा- ‘पहलगाम जैसी घटनाओं को अनदेखा नहीं किया जा सकता’, केंद्र को जवाब देने के लिए 8 हफ्ते का समय दिया।
नई दिल्ली, 14 अगस्त (वार्ता): जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस मामले में “जमीनी हकीकत पर विचार करना जरूरी है”। कोर्ट ने कहा कि “पहलगाम जैसी घटनाओं” को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। मुख्य न्यायाधीश बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन की पीठ ने केंद्र सरकार को याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए 8 हफ्तों का समय दिया है।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने केंद्र सरकार की तरफ से पेश होते हुए कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं, लेकिन क्षेत्र में “असामान्य परिस्थितियां” हैं। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया है कि जम्मू-कश्मीर को लगभग 5 साल तक केंद्र शासित प्रदेश बनाए रखना उसके लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर कर रहा है, जिससे विकास को गंभीर नुकसान हो रहा है।

