
सिंगरौली । जिले के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के कार्यपालन यंत्री की नित्य नए काले कारनामों का चि_ा खुलने लगा है। अब मुख्यमंत्री एवं रेट्रोफिटिंग योजनाओं के पाइप लाइन बिछाने में घालमेल किये जाने का मामला सामने आ रहा है, जहां संविदाकार एवं कार्यपालन यंत्री पर तरह-तरह के आरोप लगाए जा रहे हैं।
दरअसल जिले के विकासखंड चितरंगी के ग्राम पंचायत खैरा, घोघरा, कसर, धवई, नौगई-द्वितीय पराई, बैरदह, पराई एवं देवसर विकासखंड के ओड़गड़ी एवं बाघाडीह में करीब पॉच वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री योजनाओं तथा रेट्रोफिटिंग योजनाओं के तहत करीब 6 करोड़ रूपये की लागत से कार्य मंजूर किये गये थे, किंतु आरोप है कि उक्त 6 करोड़ रूपये में व्यापक खेला हुआ, वहीं पीएचई कार्यपालन यंत्री ने परीक्षण पुनरीक्षित उपरांत लागत करीब 19 करोड़ रूपये और बढ़ा दिया। हालांकि सूत्र बताते हैं कि यह कार्यपालन यंत्री के अधिकार क्षेत्र से बाहर है। इन्हें सिर्फ 10 प्रतिशत पुनरीक्षित राशि बढ़ाने का अधिकार है। इसके बावजूद कार्यपालन यंत्री खेला कर दिया है। इधर उक्त पंचायतो में घर-घर पानी पहुंचाने के उद्देश्य से करीब चार वर्ष पूर्व पाइप लाइन बिछाने का कार्य किया था। उसी ठेकेदार को फिर से कार्य दिया गया। हैरानी की बात है कि यही ठेकेदार ने पहले भी पाइप बिछाने का कार्य किया था और दोबारा इसी ठेकेदार ने फिर से पाइप लाइन बिछा दिया। लेकिन आरोप लगाया जा रहा है कि पाइप लाइन के लिए खोदे गये गड्ढों की गहराई नाममात्र की है। यदि हैवी वाहन चलेंगे तो पाइपो के टूटने का पूरी तरह से अंदेशा है। आम आदमी पार्टी के प्रदेश सचिव राजेश सोनी का आरोप है कि क्या प्राक्कलन के अनुसार पाइप बिछाने का कार्य किया गया है? इसकी उच्च स्तरीय जांच होनी चाहिए।
ढाई साल के कार्य काल में एक बार भी नही हुई समीक्षा: सूर्या
युवक कांग्रेस पार्टी सिंगरौली के पूर्व जिलाध्यक्ष सूर्य कुमार द्विवेदी सूर्या ने प्रदेश सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाते हुये कहा है कि मोहन सरकार का कार्यकाल ढाई साल पूरा हो गया है और इस ढाई साल में प्रभारी मंत्री के द्वारा एक बार भी देवसर-चितरंगी में संचालित रेट्रोफिटिंग योजनाओं की एक बार भी समीक्षा बैठक नही की गई और इतनी भारी भरकम राशि कैसे बढ़ा दी गई? कहीं न कहीं इसमें बड़ा खेला हुआ है। ऐसा प्रतीत हो रहा है। उन्होंने पीएचई मंत्री एवं जिले के प्रभारी मंत्री को भी आड़े हाथों लेते हुये कहा है कि उनके संज्ञान में होगा, इसीलिए मौन हैं।
6 करोड़ रूपये कहां गया?, हिसाब-किताब नही!
विपक्षी दल के कई नेताओं के द्वारा आरोप लगाया जा रहा है कि पहले के 6 करोड़ रूपये कहां गये? यदि गलत तरीके से पाइप लाइन बिछाई गई थी तो ठेकेदार के साथ-साथ सहायक यंत्री एवं उपयंत्री पर क्या कार्रवाई हुई?, पीएचई कार्यपालन यंत्री को बताना चाहिए। साथ ही 6 करोड़ का हिसाब-किताब भी देना चाहिए। विपक्षी दल के नेताओं ने कहा है कि राशि की बंदरबांट की गई है और भाजपा सरकार में भ्रष्टाचार ही चल रहा है। जिले में प्रभारी मंत्री सम्पतिया उईके का दौरा भी होता है, लेकिन कभी भी इसपर समीक्षा नही करती, जबकि उन्ही का विभाग है। विभागीय मंत्री की चुप्पी पर भी तरह-तरह के सवाल उठाए जा रहे हैं।
