भैरूंदा. पूर्व मुख्यमंत्री एवं वर्तमान कृषि मंत्री के संसदीय क्षेत्र में खरीफ फसल के लिए पर्याप्त मात्रा में यूरिया व डीएपी खाद न मिलने से इंदौर-भोपाल हाईवे को किसानों ने विरोध स्वरूप जाम कर दिया.
चक्काजाम की सूचना प्रशासनिक अमले तक पहुंची तो उन्होंने तुरंत ही डबल लाख वेेयर हाउस से किसानों को टोकन देना शुरू कर दिया. तब कहीं जाकर किसानों ने जाम हटाया. लेकिन घंटों कातार के बाद एक दो-दो बोरी खाद मिलने से किसानों में मायूसी देखी गई और किसान बोले की घंटों इंतजार के बाद एक-दो बोरी ऊंट के मुंह में जीरे के समान है. क्योंकि हमें कहीं अधिक खाद की आवश्यकता थी. लेकिन प्रशासन ने जाम खुलवाने के लिए प्रसाद के रूप में खाद बटवा कर किसानों के साथ छलावा किया है.
खरीफ फसल हो या रवि फसल के समय देखा जाता था कि जब फर्टिलाइजर को लेकर सरकारी एजेंसियां खाली हाथ रहती थी तब निजी एजेंसी के द्वारा किसानों की पूर्ति के लिए खाद मिल जाता था. लेकिन इस बार निजी एजेंसी ने भी इसलिए खाद नहीं मंगवाया क्योंकि उन्हें खाद के साथ नैनो डीएपी भी दिया जाता था. जो किसान खरीदने को तैयार नहीं होता था. ऐसी स्थिति में निजी व्यापारियों द्वारा जहां से भी खाद खरीदा जाता था बहा अधिक शुल्क दिया जाता था और बह अधिक दाम लेकर किसनो की पूर्ति कर दिया करते थे.
हंगामा कर रहे किसानों को का कहना था कि स्थानीय प्रशासन के द्वारा जितने भी मदद हम किसानों की जा सकती थी उतनी की जा रही है. लेकिन खाद की समस्या स्थानिक प्रशासन के हाथ में न होकर जिलाधिकारी व विधायक के हाथों में है. लेकिन बार-बार फोन करने पर न तो विधायक हमारा फोन रिसीव कर रहे हैं और न ही कलेक्टर ऐसे में हम हमारी पीड़ा किसे सुनाएं क्योंकि दोनों ही व्यक्ति जवाबदार है. लेकिन वह हमारी पीड़ा सुनने को तैयार नहीं है. किसानों की समस्या से कोई लेना-देना नहीं है तभी तो इतने आंदोलन के बाद भी क्षेत्र में खाद की आपूर्ति नहीं हुई है.
