श्रीनगर (वार्ता) जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने लोगों से राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान की रक्षा और उसे बनाए रखने का आग्रह किया और इसे भारत की पहचान, गौरव और अनगिनत देशभक्तों के बलिदान का जीवंत प्रतीक बताया।
श्री उमर श्रीनगर के चश्मा-ए-शाही स्थित नेहरू मेमोरियल बॉटनिकल गार्डन में संपन्न तिरंगा रैली में उपस्थित जनसमूह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने अतीत को याद करते हुए कहा कि एक समय था जब राष्ट्रीय ध्वज को केवल सरकारी भवनों के ऊपर ही फहराने की अनुमति थी, इसे घरों, कार्यस्थलों या निजी स्थानों पर फहराने की अनुमति नहीं थी।
उन्होंने कहा, ”यही वह वास्तविकता थी जिसमें हम रहते थे – ध्वज राष्ट्र का था, फिर भी यह हमारे निजी जीवन से गायब था।”
उन्होंने अदालतों का दरवाजा खटखटाकर हर भारतीय को अपने घरों पर तिरंगा फहराने का अधिकार दिलाने वाले एक दृढ़निश्चयी नागरिक की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह बदलाव इस बात का प्रमाण है कि ”सही इरादों से प्रेरित एक व्यक्ति भी स्थायी बदलाव ला सकता है।”
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वालों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा, ”उन्होंने राष्ट्र के भविष्य के लिए अपना वर्तमान त्याग दिया, ज़रूरत पड़ने पर अकेले खड़े रहे और उनका मानना था कि उनका एक भी साहसपूर्ण कार्य हमारे तिरंगे की गरिमा की रक्षा कर सकता है।”
श्री उमर ने इस बात पर ज़ोर देते हुए कि ध्वज केवल आधिकारिक समारोहों के दौरान ही नहीं, बल्कि निरंतर गौरव का प्रतीक बना रहे , नागरिकों से ”अपने पूर्वजों के बलिदानों से प्रेरित होकर, इसे शारीरिक रूप से और सम्मान के साथ और भी ऊँचा उठाने” का आह्वान किया।
मुख्यमंत्री ने इससे पहले उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के साथ शेर-ए-कश्मीर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र (एसकेआईसीसी) के मनोरम लॉन से एक जीवंत तिरंगा रैली का नेतृत्व किया।
मंत्री सकीना इटू, जावेद राणा और जावेद डार भी वरिष्ठ नागरिक एवं पुलिस अधिकारियों के साथ उपस्थित थे। इस रैली में युवाओं एवं छात्रों सहित सभी वर्गों के लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
