पनामा नहर के बारे में अमेरिका के आराेप बेबुनियाद- चीन

संयुक्त राष्ट्र, 12 अगस्त (वार्ता) संयुक्त राष्ट्र में चीन के स्थायी प्रतिनिधि फू कांग ने सोमवार को समुद्री सुरक्षा को लेकर चीन पर लगाए गए अमेरिका के उन आरोपों को खारिज कर दिया जिनमें पनामा नहर पर चीन के कथित ‘प्रभाव’ की बात कही गयी है।

श्री फू ने कहा कि हाल ही में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने चीन पर बार-बार अनुचित आरोप लगाए हैं। “हम इसका कड़ा विरोध करते हैं।”

उन्होंने सुरक्षा परिषद में समुद्री सुरक्षा पर एक उच्चस्तरीय खुली बहस में भाग लेते हुए कहा “चीन ने हमेशा नहर पर पनामा की संप्रभुता का सम्मान किया है और एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग के रूप में नहर की स्थायी तटस्थता को मान्यता देता है।”

श्री फू ने कहा “अमेरिका द्वारा चीन के खिलाफ झूठे आरोप गढ़ना और निराधार हमले करना नहर पर नियंत्रण पाने के बहाने के अलावा और कुछ नहीं हैं। चीन आर्थिक दबाव और धमकाने के तरीकों का कड़ा विरोध करता है और अमेरिका से झूठे आरोप लगाने तथा इस तरह के व्यवधान नहीं करने का आग्रह करता है।”

इस बीच संयुक्त राष्ट्र में कार्यवाहक अमेरिकी प्रतिनिधि डोरोथी शी ने अपने बयान में दक्षिण चीन सागर का अप्रत्यक्ष रूप से उल्लेख करते हुए “पनामा नहर क्षेत्र पर चीन के अत्यधिक प्रभाव” और “चीन के व्यापक एवं गैरकानूनी समुद्री दावों और आक्रामक कार्रवाइयों” का ज़िक्र किया।

हालांकि इस में श्री फू ने कहा कि दक्षिण चीन सागर में शांति और स्थिरता में सबसे बड़ा बाधा अमेरिका ही है।

उन्होंने कहा कि अमेरिका ने इस क्षेत्र में ज़मीन आधारित मध्यम दूरी की मिसाइलों सहित आक्रामक हथियार तैनात किए हैं। उसने दक्षिण चीन सागर में टोही और सैन्य अभ्यास करने के लिए बार-बार बड़े पैमाने पर नौसेना और वायु सेनाएँ भेजकर अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन किया है और दूसरे देशों की ‘सीमाओं’ पर धावा बोला है। श्री फू ने कहा कि इसका उद्देश्य अपने भू-राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए क्षेत्र में अस्थिरता पैदा करना है।

उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिकी आधिपत्य, शीत युद्ध की मानसिकता और एकतरफ़ा कार्रवाइयाँ वैश्विक समुद्री सुरक्षा के लिए जोखिम को गंभीर रूप से बढ़ा रही हैं।

गौरतलब है कि अमेरिका ने अभी तक ‘संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन’ की बातें नहीं मानी है और वह इससे संबंधित दायित्वों को पूरा करने से भी इनकार कर रहा है। वह अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संसाधनों का एकतरफा दोहन करने का निर्णय लेकर अंतर्राष्ट्रीय कानून और अंतर्राष्ट्रीय समुद्री प्राधिकरण की चेतावनी की अवहेलना कर रहा है जिससे मानवता की साझी विरासत पर उसका कब्ज़ा हो रहा है।

इस बीच श्री फू ने कहा कि अमेरिका ने समुद्री मुद्दों से संबंधित सुरक्षा अवधारणाओं का दुरुपयोग किया है, समुद्री बुनियादी ढांचे के विकास में बाधा डाली है और औद्योगिक एवं आपूर्ति श्रृंखलाओं की स्थिरता को कमज़ोर किया है।

उन्होंने कहा “हम अमेरिका से आग्रह करते हैं कि वह गंभीरता से आत्मचिंतन करे और एक प्रमुख देश के रूप में सद्भावनापूर्वक अपनी ज़िम्मेदारियाँ निभाए।”

 

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