मुंबई, 08 अगस्त (वार्ता) रिलायंस इंडस्ट्रीज ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में कहा है कि उसकी दूरसंचार सेवा इकाई रिलायंस जियो वर्ष 2030 तक पूरी तरह से हरित ऊर्जा का इस्तेमाल शुरू कर देगी।
हाल में जारी इस रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनी ने साल 2035 तक नेट कार्बन जीरो का लक्ष्य रखा है, और इसके लिए वह कई मोर्चों पर एक साथ काम कर रही है।
रिलायंस जियो वर्ष 2030 तक 100 फीसदी ग्रीन एनर्जी का इस्तेमाल करने लगेगी। अपने लक्ष्य को पाने के लिए कंपनी ने 23,699 स्थानों पर सौर ऊर्जा पैनल स्थापित किए हैं जिनसे 212 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। इसके अतिरिक्त, जियो ने कर्नाटक के बीदर में 35 मेगावाट क्षमता वाला एक केंद्रीकृत सौर संयंत्र भी स्थापित किया है। जियो अपने वैश्विक प्रतिस्पर्धियों की तुलना में ऊर्जा दक्षता में आगे है। जीएसएमएआई ने एनर्जी बेंचमार्किंग पर अपनी मार्च 2025 की रिपोर्ट में माना कि जियो की प्रति जीबी ट्रैफिक पर ऊर्जा खपत वैश्विक औसत का लगभग 30 प्रतिशत है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज ने बताया है कि उसने गुजरात के कच्छ में सौर ऊर्जा प्लांट के लिए भूमि का विकास शुरू कर दिया है। कंपनी की यहां 150 अरब यूनिट बिजली निर्माण की योजना है। कंपनी जल्द ही गुजरात के कांडला में दो हजार एकड़ में ग्रीन कैमिकल के उत्पादन का काम भी शुरू करने जा रही है। कांडला और लकड़िया-1 में दो एनर्जी ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट भी रिलायंस को मिले हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, गुजरात के जामनगर में रिलायंस की सोलर पीवी गीगा फैक्ट्री, एक गीगावाट से अधिक क्षमता के साथ चालू हो गई है। रिलायंस ने इस वित्त वर्ष में 10 गीगावाट एकीकृत सोलर पीवी निर्माण क्षमता तक पहुंचने का लक्ष्य रखा है। वहीं 30 गीगावाट आवर बैटरी निर्माण सुविधा 2025-26 तक चरणबद्ध तरीके से चालू हो जाएगी।
रिलायंस 130 टीपीडी (टन प्रति दिन) उत्पादन क्षमता वाले सात कंप्रेस्ड बायो गैस (सीबीजी) संयंत्रों को भी चला रही है। ये संयंत्र उच्च गुणवत्ता वाली दो लाख टीपीए (टन सालाना) जैविक खाद का भी उत्पादन करेंगे।
कंपनी 55 सीबीजी संयंत्र स्थापित करने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रही है। ग्रीन हाइड्रोजन क्षमता को बेहतर बनाने के लिए कंपनी ने एक मल्टी-गीगावाट इलेक्ट्रोलाइजर संयंत्र के संचालन की योजना बनाई है। इसके लिए दहेज के पास नौयान शिपयार्ड का भी अधिग्रहण किया गया है।
