प्रदेश में 56 में से 23 सार्वजनिक उपक्रम, निगम चल रहे घाटे में

ग्वालियर। विगत वित्तीय वर्ष में प्रदेश के 56 सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों, निगमों में से 23 उपक्रम घाटे में चल रहे थे। इतना ही नहीं संबंधित अधिनियमों के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए इन 56 सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों, निगमों, कंपनियों के लेखे बकाया हैं। मप्र आदिवासी वित्त एवं विकास निगम और मप्र राज्य सड़क परिवहन कॉर्पोरेशन लि. के लेखे क्रमशः 18 वर्ष और 16 वर्ष से बकाया थे तथा 54 सार्वजनिक उपक्रमों के संबंध में यह एक से 11 वर्ष के बीच लंबित रहा।

राज्य विधानसभा में रखे गए मप्र शासन से संबंधित भारत के सीएजी के वर्ष 2023 24 के लिए राज्य के वित्त पर लेखा परीक्षा प्रतिवेदन में यह चौंकाने वाले निष्कर्ष सामने आए हैं। यह प्रतिवेदन वर्ष 23 24 हेतु मप्र सरकार के वित्त लिखे एवं विनियोग लेखे की लेखा परीक्षा पर आधारित है और मप्र सरकार के विभिन्न प्रतिवेदन आवश्यकताओं तथा वित्तीय नियमों के साथ अनुपालन का आंकलन करता है।

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य सरकार ने 23 24 तक साविधिक निगमों, कंपनियों, सहकारी संस्थाओं इत्यादि में 47,485.80 करोड़ का निवेश किया था। 23 24 के दौरान राज्य सरकार ने इन निवेशों पर 291.41 करोड़ का प्रतिलाभ अर्जित किया जो वर्ष के दौरान औसत उधारी लागत 6.44 प्रतिशत की ब्याज दर के विरुद्ध केवल 0.61 प्रतिशत था। शासन द्वारा दिए गए कर्ज एवं अग्रिमों पर केवल 3.13 प्रतिशत की औसत ब्याज दर प्राप्त हुई।

रिपोर्ट में एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी उभरकर आया है कि राज्य सरकार की कुल देयताओं में निरन्तर बढ़ोतरी हुई। वर्ष 2019 20 में 2,30,572 करोड़ से 2023 24 तक 77.50 प्रतिशत से बढ़कर 4,09,262 करोड़ तक हो गई। विगत वर्ष की तुलना में लोक ऋण में 14.46 प्रतिशत से वृद्धि हुईं। अवधि 2019 24 के दौरान लोक लेखा देयताओं में 28.90 प्रतिशत की वृद्धि हुईं। मुख्य वृद्धि ब्याज सहित आरक्षित निधिया (7,968 करोड़) एवं ब्याज रहित आरक्षित निधियां (6,729 करोड़) के अंतर्गत थीं।

*उपयोगिता प्रमाणपत्रों की प्रस्तुति में विलंब*

रिपोर्ट में एक दिलचस्प तथ्य यह है कि वर्ष 2023 24 के दौरान लेखा परीक्षा में देखा गया कि 13 अनुदानों से संबंधित 14 स्वीकृतियां और एक अनुदान से संबंधित पांच स्वीकृतियां महालेखाकार लेखा एवं हकदारी प्रथम द्वारा निर्धारित समय सीमा के बाद जारी की गई और संबन्धित स्वीकृति आदेशों को महालेखाकार ने लेखों में शामिल करने हेतु स्वीकार नहीं किया। आधिक्य व्यय जिसके नियमितीकरण की आवश्यकता है, इस संदर्भ में संविधान के अनुच्छेद 205 के अनुसार अवधि 2011 21 के लिए छः अनुदानों और तीन विनियोगों से संबंधित 1,173,64 करोड़ के आधिक्य व्यय को नियमित किया जाना था। रिपोर्ट में बजट से भिन्नता के लिए अनुपलब्ध, अपूर्ण स्पष्टीकरण एवं उपयोगिता प्रमाणपत्रों की प्रस्तुति में विलंब जैसे बिंदुओं को भी स्पष्टता से रेखांकित किया गया है।

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