जबलपुर: जिले में धान अफरा तफरी मामले में 16 राइस मिलर पर हुई एफआईआर के बाद मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाई कॉर्पोरेशन द्वारा 15 जुलाई को आदेश जारी करते हुए उक्त 16 राइस मिलर द्वारा जो चावल जमा किया गया था, उसकी ऐज टेस्ट और गुणवत्ता परीक्षण के लिए एक तीन सदस्य जांच दल बनाया गया था। जिसे 3 दिन के के भीतर अपनी रिपोर्ट देनी थी। लेकिन आदेश आने के 15 दिन बाद भी मामले में जांच दल के द्वारा कोई भी रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं की गई है। जबकि जांच दल जबलपुर आकर उक्त राइस मिलरों के सैंपल सील बंद पैकेट में भोपाल ले जा चुका है।
चावल की गुणवत्ता के साथ उसकी उम्र का भी परीक्षण
चावल की गुणवत्ता के साथ-साथ उसकी उम्र का भी परीक्षण किया जाता है, जिसके लिए ऐज टेस्ट की व्यवस्था की गई है। जिसमें एक केमिकल होता है, जिसमें चावल को डाला जाता है यदि उसका कलर एफोरेडो ग्रीन आ जाता है तो वह नया चावल माना जाता है और अगर कलर एफोरेडो ग्रीन नहीं आता तो उसे पुराना चावल माना जाता है। लेकिन मिलिंग होने के 3 महीने तक ही यह चावल का परीक्षण सटीक परिणाम देता है। यदि चावल 3 महीने से ज्यादा पुराना हो जाता है तो परिणाम उतना सटीक नहीं होता है। वही जिस मामले में जांच करने के आदेश दिए गए हैं, उसमें चावल लगभग 6 माह पुराना हो चुका है और बहुत बड़ी मात्रा तो राशन दुकानों में बट भी चुकी है, ऐसे में यह टीम जो परिणाम देगी, वह उतना उम्र के मामले में तो कारगर नहीं होगा। लेकिन क्वालिटी के मामले में जरूर वास्तविकता सामने आएगी।
पुराने चावल का था आरोप
इस पूरे मामले में जो 16 राइस मिलर के ऊपर एफआईआर दर्ज की गई है, उसमें करोड़ों रुपए की अफरा तफरी की बात कही गई है। लेकिन राइस मिलरों का कहना है कि उनके द्वारा उक्त धान के एवज में पूरा चावल जमा कर दिया गया है। उसके बाद जिला स्तर पर तो कार्यवाही की ही गई थी मुख्यालय स्तर पर भी चावल की गुणवत्ता और उम्र देखने के लिए दल का गठन किया गया था, लेकिन यह पूरा मामला कहीं न कहीं ठंडा होता जा रहा है।
