मालवा- निमाड़ की डायरी
संजय व्यास
पिछले 2018 के चुनाव को छोड़ दें तो पूर्व विधान सभा अध्यक्ष बृजमोहन मिश्र की पुत्री व पूर्व मंत्री अर्चना चिटनीस बुरहानपुर विधान सभा सीट की पर्याय बनी हुई हैं. क्षेत्र में अच्छी पकड़ और संघ का उन पर वरदहस्त उन्हें यहां से चार चुनाव जिता चुका है. भाजपा सरकार में शिक्षा मंत्री रह चुकीं अर्चना चिटनीस को 2018 में एंटी इनकंबेंसी के कारण निर्दलीय प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह ठाकुर शेरा के हाथों अपनी पारंपरिक बन चुकी यह सीट गंवानी पड़ी थी. 2023 में पुन: वापसी कर उन्होंने शेरा (अब कांग्रेसी) को हरा दिया था.
अर्चना चिटनीस के रहते बुरहानपुर सीट पर दावेदारी जताते रहे मनोज तारवाला, हर्षवर्धन सिंह चौहान, मनोज लधवे व अन्य दरकिनार किए जाते रहे. ऐसे ही दावेदारों को अब उम्मीद के पंख लगे हैं, कारण 2026 का होने वाला परिसीमन है. चर्चा है कि नए परिसीमन में बुरहानपुर जिले में एक और सीट शाहपुर विधान सभा का पुन: उदय होगा. पिछले परिसीमन के पहले भी शाहपुर विधान सभा सीट अस्तित्व में थी.
नई सीट बनने से भाजपा नेताओं को आशा है कि दावेदारों का क्षेत्र में विभाजन होगा. इस स्थिति में भाजपा नेताओं द्वारा अभी से जमावट शुरू कर दी गई है. हालांकि गत चुनाव में बगावती सुरों के कारण कुछ दावेदार पार्टी की अनुशासनात्मक कार्रवाई की चपेट में आ चुके हैं. वे फिर नए सिरे से भाजपा नेतृत्व की नजरें इनायत में लग गए हैं. इनके अलावा नेपानगर विधायक मंजू दादू पूर्व क्षेत्रीय विधायक सुमित्रा कास्डेकर से अनबन और प्रतिस्पर्धा की वजह से अपना क्षेत्र बदलने की मंशा रखतीं हैं. उनकी नजर भी संभावित शाहपुर सीट पर है.
जिज्ञासा का अंत नहीं हो रहा
अंचल में कांग्रेस के संगठन सृजन अभियान की पर्यवेक्षकों ने प्रक्रिया पूर्ण कर नामों के पेनल दिल्ली दरबार को सौंप दिए हैं. अब कार्यकर्ता-दावेदारों को परिणाम का इंतजार है. कहा जा रहा था कि जुलाई माह में जिला संगठन पदाधिकारियों की घोषणा कर दी जाएगी. माह के अंतिम दिवस चल रहे हैं और जिज्ञासा का अंत नहीं हो रहा. वैसे युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष के पदों के लिए भी लड़ाई दिलचस्प है. हर एक जिले में दो और तीन से ज्यादा उम्मीदवार हैं. इस मामले में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार का जिला सबसे ज्यादा खास है, क्योंकि धार जिले में सबसे ज्यादा 15 उम्मीदवारों ने युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष का चुनाव लड़ा है.
पुराने फार्म में लौटे शाह
कर्नल सोफिया टिप्पणी विवाद में घिरे हरसूद विधायक व प्रदेश सरकार में जनजातीय कार्य विभाग के मंत्री कुंवर विजय शाह उच्च न्यायालय के निर्देश पर उन पर दर्ज पुलिस प्राथमिकी और एसआईटी जांच के बाद एक तरह से सार्वजनिक जीवन के प्रति सुप्तावस्था में चले गए थे. प्राथमिकी के खिलाफ मामला सर्वोच्च न्यायालय में लेकर पहुंचे शाह की सुनवाई विचाराधीन है. इस दौरान मंत्रिमंडल बैठकों से भी वे किनारे रहे.
अब लगता है शाह ने अपना भविष्य सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय पर छोड़ दिया है इसीलिए फैसले की प्रतीक्षा के बजाय उन्होंने अपने पुराने फार्म में लौटना ठीक समझा. इसी तारतम्य में वे विगत दिनों खंडवा के खालवा विकासखंड के ग्राम जामनी गुर्जर स्थित कन्या शिक्षा परिसर पहुंचे, जहां उन्होंने छात्राओं के साथ बैठकर भोजन किया और उनकी समस्याएं सुनी. यही नहीं शाह ने एक पालक की तरह उनकी प्रगति, उच्च शिक्षा व सुविधाएं दिलाने में हर संभव सहायता की बात कही.
उल्लेखनीय है कि शाह जब-तब विद्यार्थियों के बीच उनकी बात सुनने जाकर अपनतत्व का अहसास कराते रहते हैं. क्षेत्र में उनकी लोकप्रियता का कारण शाह की सरलता ही है. इसके अलावा वे नए भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से मुलाकात करने बैतूल और अपनी कुलदेवी झूलेवाली माता पूजन के लिए हरसूद भी गए, साथ ही जनता से मेल मिलाप कर हाल भी जाने.
