प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात बढ़ाने की जरूरत: पासवान

नयी दिल्ली, 29 जुलाई (वार्ता) केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने मंगलवार को कहा कि देश के खाद्य निर्यात में प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के निर्यात की हिस्सेदारी फिलहाल 23 प्रतिशत है जिसे और बढ़ाने की जरूरत है।
श्री पासवान ने खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सहयोग से यहाँ इंडिया हैबिटेट सेंटर में इंडियन इंडस्ट्रीज़ एसोसिएशन (आईआईए) द्वारा “प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना: उत्तर भारत के परिप्रेक्ष्य से” विषय पर आयोजित एक क्षेत्रीय सेमिनार में कहा कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र अभी अपनी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं कर पाया है। उन्होंने उद्योग जगत से आह्वान किया कि वे जमीनी स्तर पर किसानों और छोटे उद्यमियों के साथ अपनी भागीदारी को और मजबूत करें।
उन्होंने कहा कि देश तब तक वास्तव में सक्षम नहीं बन सकता जब तक हमारे किसान सशक्त न हों। इस दिशा में प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना एक परिवर्तनकारी कदम है जो फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करता है, मूल्य संवर्धन को बढ़ावा देता है और किसानों को सीधे वैश्विक बाज़ारों से जोड़ता है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि देश से प्रसंस्कृत खाद्य निर्यात का हिस्सा 2013 के 13 प्रतिशत से बढ़कर 2024 में 23 प्रतिशत हो गया है। यह एक सकारात्मक संकेत है, लेकिन इस गति को और तेज करने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि उत्तर भारत के अनेक राज्य, विशेषकर उत्तर प्रदेश और बिहार, कृषि उत्पादन में अग्रणी होने के बावजूद खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में अपेक्षाकृत पीछे हैं। ऐसे राज्यों में कोल्ड स्टोरेज और लॉजिस्टिक्स जैसी अवसंरचनात्मक आवश्यकताओं को प्राथमिकता से पूरा करने की जरूरत है।
सेमिनार में उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में योजना के क्रियान्वयन की प्रगति की समीक्षा की गई और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के भविष्य को लेकर विचार-विमर्श किया गया।
श्री पासवान ने घोषणा की कि ‘वर्ल्ड फूड इंडिया 2025’ का आयोजन इस वर्ष सितंबर में दिल्ली के भारत मंडपम में किया जाएगा, जो देश की खाद्य प्रसंस्करण क्षमताओं को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करने का एक सुनहरा अवसर होगा।
आईआईए की अध्यक्ष ममतामयी प्रियदर्शिनी ने नीति और जमीनी क्रियान्वयन के बीच की दूरी को पाटने की जरूरत पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान संपदा योजना में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने की क्षमता है, लेकिन इसके लिए आवश्यक है कि उद्योग जगत योजना से गहराई से जुड़े।
आईआईए के वरिष्ठ उपाध्यक्ष आलोक अग्रवाल ने छोटे खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों के लिए क्षमता निर्माण, तकनीकी उन्नयन और गुणवत्ता मानकों को अपनाने पर ज़ोर दिया।

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