
जबलपुर। भगवान भोलेनाथ ही मेरी शक्ति है.. कैलाशधाम में उनको नर्मदा जल चढ़ाने के बाद ही मेरी बेड़ियां हटेंगीं। ये बातें तीसरे सावन सोमवार को गौरीघाट नर्मदा तट के पास आगा चौक निवासी शिवभक्त माछलय कोरी उम्र 25 वर्ष ने कही। गौरीघाट मार्ग पर जिस किसी ने इस शिवभक्त को देखा वो थोड़ी देर के लिए हैरत में पड़ गया और फिर चर्चाएं होने लगीं कि वाकई में भक्ति हो तो ऐसी हो। बेड़ियों में लिपटे शिवभक्त दिनभर शहर में सुर्खियों में भी रहा। क्योंकि इनके पैर भी बेड़ियों में लिपटे हुए थे।
जानकारी के अनुसार सोमवार को माछलय कोरी नामक युवक अपने चार दोस्तों के साथ गौरीघाट स्थित नर्मदा तट पहुंचा था। यहां युवक ने नर्मदा पूजन अर्चन किया और फिर
पीतल के दो कमंडल में नर्मदा जल भरा , फिर पैरों और हाथों में लोहे की जंजीरें बांधकर पैदल यात्रा शुरू कर दी। जिसने भी माछलय को देखा तो हतप्रभ रह गया। ये शिवभक्त गौरीघाट से कैलाशधाम तक करीब 35 किलोमीटर का सफर पैदल तय करेगा और फिर कैलाशधाम में भगवान शिव को नर्मदा जल अर्पित करने के बाद अपनी बेड़ियां खोलेगा।
पवित्र संकल्प ने दिया हौंसला
शिवभक्त के साथ पैदल सफर उसके चार दोस्त भी कर रहे हैं जो हर मोड़ पर उनका साथ दे रहे हैं। बेड़ियों में चलते वक्त कई बार युवक को थकान होती है लेकिन हौंसला बुलंद होने के सामने ये थकान पूरी मिटते नजर आ रही है। माछलय कोरी नामक युवक का कहना है कि जब संकल्प पवित्र हो तो यात्रा सिर्फ भक्ति तक ही सीमित नहीं रहती। शिवभक्त इसके पहले भी साईकिल से कई धार्मिक यात्राएं भी कर चुके हैं।
