नयी दिल्ली, 28 जुलाई (वार्ता) वित्त मंत्रालय की एक ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि मजबूत घरेलू मांग, लचीली व्यावसायिक और सेवा गतिविधि और दक्षिण-पश्चिम मानसून की अनुकूल शुरुआत के समर्थन से घरेलू अर्थव्यवस्था ने चालू वित्त वर्ष 2025- 26 की पहली तिमाही में अपनी विकास गति को बनाए रखा है।
रिपोर्ट में भारतीय रिजर्व बैंक और क्रेडिट रेटिंग एजेेंसियों के आकलन का हवाला दिया गया है जिसमें चालू वित्त वर्ष की आर्थिक वृद्वि 6.2 से 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान है।
मंत्रालय के सोमवार को जारी ‘ मासिक आर्थिक सर्वे जून-2025 ’ के अनुसार जल्दी-जल्दी प्राप्त होने वाले आंकड़ों के अनुसार भारतीय अर्थव्यवस्था की स्थिति में व्यापक स्तर पर मजबूती दिखती है जिससे साल-दर-साल अच्छी वृद्धि हो रही है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पहली तिमाही में विनिर्माण गतिविधियों में विस्तार जारी रहा, जबकि सेवा क्षेत्र ने समग्र आर्थिक विकास को गति दी। इस दौरान मुद्रास्फीति के दबाव में लगातार कमी हुई और खुदरा मुद्रास्फीति विशेष रूप से सब्जियों और दालों की कीमतों में उल्लेखनीय गिरावट के कारण जून माह में 77 महीने के निचले स्तर 2.1 प्रतिशत पर आ गई। जून में थोक मूल्य मुद्रास्फीति भी -0.1 प्रतिशत (शून्य से 0.1 प्रतिशत नीचे) अपस्फीतिकारी क्षेत्र में चली गई, जिससे लागत के मोर्चे पर और राहत मिली।
पहली तिमाही में वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर भारत का व्यापार प्रदर्शन मजबूत बना रहा और कुल निर्यात (वस्तुओं और सेवाओं) में सालाना आधार पर 5.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि मुख्य वाणिज्यिक वस्तुओं के निर्यात में इस दौरान 7.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
रिपोर्ट के अनुसार पहली तिमाही के अंत में देश का विदेशी मुद्रा भंडार आरामदायक स्तर पर बना रहा और 11 महीने के आयात के लिए पर्याप्त था। पश्चिम एशिया में संघर्ष से लेकर तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव तक, वैश्विक स्तर पर प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद, विनिमय दर में उतार-चढ़ाव नियंत्रित रहा, और जून तक रुपये में कम अस्थिरता देखी गई।
रिपोर्ट में बताया गया है कि अप्रैल-जून 2025-26 की तिमाही में माल की आवाजाही, परिवहन और व्यावसायिक गतिविधियाँ मज़बूत रहीं। इस तिमाही के दौरान 36.1 करोड़ से अधिक ई-वे बिल सृजित किए गए जो पिछले साल इसी अवधि के 30 लाख ई-वे बिल से अधिक है। यह सालना 20.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
रिपोर्ट के अनुसार 2025 में ई-वे बिलों की रिकॉर्ड-उच्च संख्या के बाद, उसकी तुलना में जून में मामूली गिरावट दर्ज की गई। रिपोर्ट में इसे एक उच्च स्तर के बाद अपेक्षित नरमी बताया गया है। डीजल और पेट्रोल की खपत में निरंतर वृद्धि माल परिवहन, यात्री गतिशीलता और औद्योगिक एवं कृषि उपयोग में निरंतर गतिविधि को दर्शाती है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पहली तिमाही के दौरान विनिर्माण गतिविधि विस्तार क्षेत्र में रही। विनिर्माण पीएमआई सूचकांक औसतन 58.1 रहा जो दीर्घकालिक औसत 54.1 से काफी ऊपर है। जून 2025 में, विनिर्माण पीएमआई मई 2025 के 57.6 से बढ़कर 14 महीने के उच्चतम स्तर 58.4 पर पहुँच गया।
पहली तिमाही में सेवा क्षेत्र का प्रदर्शन आर्थिक गतिविधि की प्रमुख शक्ति रहा। तिमाही के दौरान सेवा पीएमआई का औसत 59.3 रहा, जिसमें जून में पिछले 10 महीनों में सबसे अधिक वृद्धि दर्ज की गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि मानसून अच्छा रहने से खरीफ की बुवाई की प्रगति अच्छी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 8 जुलाई की सामान्य तिथि से नौ दिन पहले 29 जून को पूरे देश को कवर कर लिया था। 27 जुलाई तक वर्षा दीर्घावधि औसत से लगभग 8 प्रतिशत अधिक थी।
रिपोर्ट के अनुसार लगभग 78 प्रतिशत हिस्से में वर्षा सामान्य से अधिक हुई है। 17 जुलाई की स्थिति के अनुसार देश भर में 161 महत्वपूर्ण जलाशयों में कुल संग्रहण पिछले वर्ष के स्तर का लगभग 1.91 गुना और पिछले दस वर्षों के औसत का 1.70 गुना था।
मंत्रालय की रिपोर्ट में इसे खरीफ की भरपूर पैदावार के लिए शुभ संकेत बताया गया है।

