इंदौर: भाजपा की गुटबाजी निजाम बदलने के बावजूद समाप्त नहीं हुई है. पचमढ़ी प्रशिक्षण शिविर में भाजपा के संगठन पुरुषों ने एकता के अनेक मंत्र दिए थे. उसमें से एक यह भी था कि प्रत्येक जनप्रतिनिधि अपने यहां भोजन या नाश्ते का आयोजन करेगा. इस गेट टू गेदर में जिले और मंडल के सभी पदाधिकारी जनप्रतिनिधि और नेता निमंत्रित रहेंगे.
इंदौर जिले में इसकी शुरुआत करते हुए कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने एक लंच पार्टी आयोजित की. इसमें दाल बाटी की मेजबानी रखी गई. सूत्रों के अनुसार विजयवर्गीय की ओर से सभी भाजपा विधायकों, पूर्व स्पीकर सुमित्रा ताई, सांसद शंकर लालवानी, राज्यसभा सदस्य कविता पाटीदार,महापौर पुष्यमित्र भार्गव, जिला पंचायत अध्यक्ष रानी मालवीय, नगर भाजपा अध्यक्ष सुमित मिश्रा और ग्रामीण भाजपा अध्यक्ष श्रवण सिंह चावड़ा सहित सभी प्रमुख नेताओं का आमंत्रित किया गया था, लेकिन इसमें पूर्व स्पीकर सुमित्रा ताई, विधायक मालिनी गौड़, उषा ठाकुर और मनोज पटेल शामिल नहीं हुए.
जाहिर है भाजपा की गुटबाजी लगातार पिछले तीन दशकों से जारी है. 80 और 90 के दशक में राजेंद्र धारकर, विष्णु शुक्ला बड़े भैया, प्रकाश सोनकर एक तरफ होते थे तो दूसरी तरफ निर्भय सिंह पटेल, नारायण राव धर्म और भेरुलाल पाटीदार जैसे नेता रहते थे. कृष्ण मुरारी मोघे के 1988 में संभागीय संगठन मंत्री बनने के बाद यह गुटबाजी ताई-मोघे गुट बनाम बड़े भैया-प्रकाश सोनकर गुट में बदल गई.
2005 में शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री रहते हुए लंबे समय तक ताई और भाई (कैलाश विजयवर्गीय) के बीच राजनीतिक अदावत जारी रही.इंदौर जिले में यह गुटीय विभाजन बदस्तूर जारी है. हालांकि मुख्यमंत्री के समक्ष सभी नेता एक नजर आते हैं लेकिन बाकी समय गुटबाजी स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है. कैलाश विजयवर्गीय की हाल की पार्टी में भी यही नजारा नजर आया
