
रायसेन। जिला न्यायालय में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम के विशेष न्यायाधीश अरविंद रघुवंशी ने चार सगे भाइयों को दलित युवक वीर सिंह अहिरवार की हत्या करने के मामले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
मप्र शासन की ओर से धनीराम विश्वकर्मा विशेष लोक अभियोजक द्वारा की गई थी इस केस की पैरवी।
रायसेन के अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम के विशेष न्यायाधीश अरविंद रघुवंशी ने द्वारा चार सगे भाइयों को युवक वीर सिंह अहिरवार की हत्या के मामले में दोषी पाए जाने पर आजीवन कारावास की सजा सुनाई।हम आपको यह बता दें कि यह घटना 19 दिसंबर 2020 की है ।जिसमें फरियादी इमरत सिंह अहिरवार ने देवनगर ( देहगांव ) थाने में शिकायत की थी कि उसका बेटा वीर सिंह अहिरवार अपनी मोटरसाइकिल से अपने खेत पर जा रहा था ।तो पास में ही रहने वाले रामकेश,लक्ष्मी नारायण, गुड्डा और बनिया गुर्जर ने उसकी मोटरसाइकिल को रोककर उसके साथ मारपीट की थी ।और नीचे पटक कर कुल्हाड़ियों से जानलेवा हमला किया था ।इस मारपीट की घटना में वीर सिंह की मौत हो गई थी तो वहीं पुलिस ने इस मामले में चालान पेश किया था ।जिस पर सुनवाई पूरी होते ही विशेष न्यायाधीश अरविंद रघुवंशी द्वारा रामकेश,लक्ष्मी नारायण,गुड्डा और बनिया को हत्या के मामले में दोषी पाया और आजीवन कारावास की सजा सुनाई।साथ ही इन सभी पर 500 रुपए का अर्थ दंड भी लगाया गया।विशेष न्यायाधीश ने 15 गवाह और साक्ष्यों के आधार पर अपने 50 पेज के फैसले में आजीवन कारावास की सजा सुनाई।वही सरकारी वकील धनीराम विश्वकर्मा ने बताया कि चारों भाईयों ने मिलजुलकर वीर सिंह अहिरवार की हत्या की थी। जिसके बाद विशेष न्यायाधीश के समक्ष साक्ष्य के आधार पर इन सभी को दोषी पाया गया। जिसके बाद इन सभी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
