उज्जैन: स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर की द्वितीय मंजिल पर स्थित नागचंद्रेश्वर मंदिर वर्ष में केवल एक दिन, नाग पंचमी पर दर्शन के लिए खुलता है.यहां शिव-पार्वती के दुर्लभ स्वरूप के साथ तक्षक नाग विराजमान हैं, जो सर्प शय्या पर स्थित हैं. मान्यता है कि तक्षक नाग भगवान शिव के परम भक्त हैं, जिन्होंने कठोर तप कर अमरत्व प्राप्त किया और महाकाल वन में वास किया.
पौराणिक कथाओं के अनुसार, सुल्तान इल्तुतमिश ने मंदिर के नीचे छिपे खजाने पर आक्रमण किया था, जिसकी रक्षा तक्षक नाग ने की थी. आज भी यह खजाना सुरक्षित है। मंदिर का निर्माण 1050 ई. में राजा भोज ने कराया था और 1732 में राणोजी सिंधिया ने इसका पुनरुद्धार किया. मंदिर की व्यवस्था महानिर्वाणी अखाड़ा संभालता है, और नाग पंचमी पर विशेष पूजन होता है. दर्शन से सर्प दोष से मुक्ति मिलती है.
