नकली कृषि उत्पादों से किसानों की आजीविका और देश की सुरक्षा को बड़ा खतरा, ग्रामीण भारत बड़े संकट से जूझ रहाः आरकेपीए ने तुरंत कार्रवाई और सुधार का आह्वान किया

नई दिल्ली, राष्ट्रीय किसान प्रोग्रेसिव एसोसिएशन (आरकेपीए) ने देश भर में नकली कृषि उत्पादों के वितरण में ज़बरदस्त बढ़ोतरी पर चिंता जताई है, जो खाद्य सुरक्षा, किसानों की आजीविका एवं देश की अखंडता के लिए बड़ा खतरा है। इस संकट को ‘अभूतपूर्व पैमाने का और खतरनाक रूप से व्यवस्थित’ बताते हुए एसोसिएशन ने चेतावनी दी है अगर इसे जल्द से जल्द हल नहीं किया जाता है, तो नकली उर्वरकों, कीटनाशकों, बीजों एवं कृषि उपकरणों के वितरण से न सिर्फ किसानों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा बल्कि मिट्टी का स्वास्थ्य, ग्रामीण अर्थव्यवस्था और देश की भीतरी सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाएगी। प्रेस सम्मेलन का नेतृत्व श्री धर्मेंद्र मलिक, राष्ट्रीय प्रवक्ता, भारतीय किसान यूनियन (गैर-राजनीतिक) और श्री बिनोद आनंद, अध्यक्ष, आरकेपीए ने किया, जिन्होंने नीति सुधार और जागरूकता फैलाने के लिए सक्रिय रूप से काम किया।

भारत में नकली उत्पादों का नेटवर्क तेज़ी से बढ़ रहा है, बड़ी बात यह है कि यह नेटवर्क व्यवस्थित है, जिसे विनियामक खामियों, कमज़ोर नियमों और मौसमी इनपुट की कमी से फायदा मिल रहा है। ये सिंडीकेट रबी एवं खरीफ़ सीज़न से पहले बड़ी मात्रा में नकली कृषि उत्पाद और जाली पैकेजिंग तैयार करते हैं और ग्रामीण बाज़ारों को नकली माल से भर देते हैं। हाल ही में 25 जून 2025 को हापुड़ में एक लाख से अधिक नकली उर्वरक के बैग ज़ब्त किए गए, जिन्हें कथित तौर पर मेरठ, गाज़ियाबाद, आगरा, मुज़फ्फरनगर सहित पश्चिमी उत्तर प्रदेश के 22 ज़िलों को भेजा जा रहा था।

राष्ट्रीय किसान प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ने किसान आंदोलनों के सहयोग से इस राष्ट्रीय संकट से निपटने के लिए मांगों का एक विस्तृत चार्टर जारी किया है। जिसमें शामिल हैः

नीतिगत कार्रवाई का अनुरोध

o सभी सीआईबीआरसी अनुमोदनों का तत्काल राष्ट्रीय सुरक्षा ऑडिट (2015-2025)-लाभार्थियों, निर्यात, शेल्फ कंपनी लिंक और दोहरे उपयोग के जोखिमों की क्रॉस-चेकिंग।

o अंतिम उपयोग की सत्यापन प्रणाली बनने तक उच्च जोखिम वाले निर्यात पर रोक- पश्चिम एशिया, मध्य अफ्रीका और अनुमोदित ज़ोनों में जाने वाले सभी शिपमेन्ट्स के लिए

o सीआईबीआरसी के प्रशासनिक ढांचे में तुरंत सुधार-पंजीकरण, लेखा परीक्षा और अनुपालन में गृह मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय को शामिल किया जाए। – सभी निर्यात-उन्मुख पंजीकरणों के लिए सुरक्षा मंज़ूरी अनिवार्य की जाए।

o रसायनिक व्यापार और संप्रभुता पर एक राष्ट्रीय आयोग का गठन- NIA, RAW, DRDO, NCB, FSSAI, DEA के सदस्यों के साथ मिलकर कृषि, फार्मा और औद्योगिक अनुप्रयोगों में भारत की रासायनिक नियंत्रण प्रणाली को नया रूप देना।

o क्यूआर कोड आधारित प्रणाली को लागू करना- सभी विनियमित बीजों, उर्वरकों एवं कीटनाशकों के लिए यह प्रणाली लागू की जाए ताकि किसान मोबाइल डिवाइस से प्रोडक्ट को स्कैन कर रियल टाईम में सत्यापित कर सकें।

o कृषि-रीटेलरों, वितरों एवं गैर-लाइसेंसी प्लेयर्स की सख्त जांच, रात में छापे और सीज़न से पहले अचानक जांच

o किसी भी डिस्ट्रीब्यूटर या अधिकारी को लापरवाही या जाली प्रोडक्ट्स के वितरण में लिप्त पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई की जाए और ब्लैकलिस्ट कर दिया जाए।

एसोसिएशन ने लाइसेंसिंग प्रक्रिया में आकस्मिक संशोधनों एवं निगरानीकी विफ़लता पर भी चिंता जताई है। ढीला रवैया अपराधियों को बढ़ावा दे रहा है और इसका खामियाज़ा गरीब ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है। किसान किसी को दोषी क़रार देने की मांग नहीं कर रहे, वे सिर्फ सुरक्षा, न्याय एवं अनियन्त्रित शोषण की समाप्ति की मांग कर रहे हैं।

प्रेस सम्मेलन के दौरान किसानों ने नकली बीजों एवं जाली लेबल वाले कीटनाशकों की वजह से उनकी फसल के नुकसान की कहानियां सुनाई, अक्सर वे पैसा उधार लेकर ये प्रोडक्ट खरीदते हैं। ऐसे में फसल खराब होने से उन पर आर्थिक और मानसिक बोझ बढ़ता है, साथ ही पर्यावरण, मिट्टी और यहां तक कि ग्रामीण स्थिरता को भी नुकसान पहुंचता है। यहां तक कि वे किसान जो आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने में सक्षम हैं, वे भी इस संकट से जूझ रहे हैं, यह भारत में कृषि की प्रगति के लिए बड़ा संकट है। किसान समूहों ने माननीय केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से आग्रह किया है, कि वे मंत्रालयों के बीच तालमेल बनाते हुए समन्वित प्रयास करें तथा मजबूत-किसान अनुकूल योजना लेकर आएं।

बिनोद आनंद, राष्ट्रीय अध्यक्ष, ग्रामीण किसान सुरक्षा संगठन ने कहा, ‘‘अगर हमारे खेतों में नकली प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल जारी रहेगा, तो भारत का भविष्य बाढ़ या सूखे से नहीं बल्कि जानबूझ कर किए गए छल से अभिशप्त हो जाएगा। इस तरह की जाली गतिविधियों से आतंकवादी नेटवर्क को भी बढ़ावा मिलता है। ऐसे में हमें इस संकट से निपटने के लिए युद्ध स्तर पर जवाबी कार्रवाई करनी होगी। किसानों को पूर्ण न्याय मिलना ही चाहिए।’’

नकली कृषि इनपुट फैलना सिर्फ एक आर्थिक धोखा नहीं है, बल्कि यह किसानों की मेहनत और भरोसे पर सीधा हमला है,” श्री धर्मेंद्र मलिक, राष्ट्रीय प्रवक्ता, भारतीय किसान यूनियन (गैर-राजनीतिक) ने कहा। “सरकार को ज़मीन स्तर पर कड़ी निगरानी और सख्त कार्रवाई करनी होगी, नहीं तो इसका नुकसान गांवों और किसानों को लंबे समय तक भुगतना पड़ेगा।

अंत में एसोसिएशन ने एक बार फिर से दोहराया कि यह लड़ाई किसी एक छापे, एक राज्य या एक फसल के बारे में नहीं है। इसे एक और धूल चाटती फाइल न बनने दिया जाए। समय आ गया है कि हम भारतीय कृषि के संरक्षक तथा राष्ट्रीय गौरव एवं विश्व शांति के रक्षक के रूप में उठकर आगे बढ़ें। आरकेपीए राष्ट्रीय हित के इस गहन मुद्दे पर शोध, नागरिक समाज के इनपुट्स एवं इस मामले पर किसानों के परिप्रेक्ष्य में योगदान देने के लिए तैयार है।

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