इंदौर: लंबे संघर्ष, जनदबाव और मीडिया की मुखरता के बाद आखिरकार प्रशासन को झुकना पड़ा और मांगलिया रेलवे क्रॉसिंग छोटे वाहनों और दोपहिया के लिए खोल दी गई. क्षेत्रीय जनता और किसान नेताओं की यह बड़ी जीत मानी जा रही है.किसान नेता हंसराज मंडलोई ने कहा कि वे लंबे समय से इस बात की मांग कर रहे थे कि मांगलिया रेलवे क्रॉसिंग को पूरी तरह बंद न किया जाए, क्योंकि यह न सिर्फ स्थानीय निवासियों, बल्कि उज्जैन और ओंकारेश्वर जाने वाले हजारों श्रद्धालुओं के लिए भी अहम रास्ता है.
लेकिन प्रशासन ने बाईपास टोल कंपनी को फायदा पहुंचाने की नीयत से यह रास्ता सीधे एक साल के लिए बंद कर दिया. इस निर्णय से इंदौर-देवास बायपास पर भारी जाम लगने लगा, जिसके चलते अर्जुन बड़ौदा और सिंगापुर टाउनशिप रोड तक पूरा ट्रैफिक ठप हो गया. इसका खामियाजा गारी पिपलिया गांव के दो युवाओं की जान जाने के रूप में भुगतना पड़ा, जबकि अन्य तीन परिवारों में मातम छा गया.
मंडलोई ने सवाल उठाया कि इन मौतों की जिम्मेदारी आखिर कौन लेगा? इस बीच, क्षेत्रीय निवासियों ने पुल निर्माण कार्य में ठेकेदार कंपनी द्वारा घटिया निर्माण कार्य करने का आरोप लगाया है और इसकी जांच की मांग की है. रेलवे गेट खुलने के बाद क्षेत्र के व्यापारिक संगठनों, स्कूलों के छात्र-छात्राओं, फैक्टि्रयों में कार्यरत श्रमिकों और हजारों माताओं-बहनों ने राहत की सांस ली है.
