उज्जैन: महाकुंभ 2028 के लिए किसानों की जमीन लैंड पूलिंग योजना के तहत विकास प्राधिकरण द्वारा ली जा रही है. इसमें 50′ जमीन किसानों के पास रहेगी और 50′ जमीन पर विकास प्राधिकरण डेवलपमेंट करेगा और उक्त जमीन धार्मिक संस्थाओं को दी जाएगी और हरिद्वार की तर्ज पर उज्जैन में भी साधु संतों धर्माचार्य महामंडलेश्वर के स्थाई आश्रम निर्मित होंगे.
यही कारण है की योजना लगभग अंतिम दौर में है,और यूडीए में अब किसानों की आवाजाही बंद हो गई है.नवभारत से चर्चा में विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने बताया कि स्थाई आश्रम की योजना जो बनाई गई है. उसमें 2027 तक मौके पर डेवलपमेंट कर दिया जाएगा, सड़क नाली, बिजली, सीवरेज से लगाकर मूलभूत सुविधाओं के तहत निर्माण कार्य पूरा कर देंगे.
लेंड पुलिंग योजना में एक जरूरी विषय
लेंड पुलिंग की पूरी योजना लगभग बनकर तैयार है, प्रस्ताव सरकार को जाएगा. हरी झंडी मिलने के बाद मौके पर कार्य शुरू होगा. साथ ही जो किसान रजामंदी देंगे उन्हें नियमानुसार सिंगल मुआवजा दिया जाएगा, जो किसान इनकार करते हुए आपत्ति रहेंगे उन्हें डबल मुआवजा देकर पूरी जमीन अधिग्रहित कर ली जाएगी.
मुख्यमंत्री ने कहा हरिद्वार की तर्ज पर उज्जैन में स्थाई आश्रम
दरअसल मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने 22 अक्टूबर 2024 को स्थाई आश्रम के मद्देनजर उक्त लैंड पूलिंग योजना के बारे में पत्रकारों से अपनी मंशा जाहिर की थी, और विकास प्राधिकरण को इसका जिम्मा दिया गया था. यही कारण है कि उज्जैन के किसानों की 50′ जमीन पर विकास कार्य किए जाने की तैयारी पूरी हो चुकी है, बीते दिनों उज्जैन आए मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने फिर दोहराया है कि हरिद्वार की तर्ज पर स्थाई योजना जल्द आकार लेगी.
बार-बार निर्माण से निजात
12 वर्ष में एक बार जो सिंहस्थ का आयोजन होता है उसके लिए बार-बार किसानों से जमीन अधिग्रहित की जाती है, और अस्थाई तौर पर योजना बनाई जाती है, बाद में किसानों को जमीन लौटा दी जाती है और बनाया गया निर्माण खत्म कर दिया जाता है, अब सिंहस्थ के दृष्टिगत सड़क, बिजली, पेयजल, जल-निकासी इत्यादि मूलभूत सुविधाओं के लिए स्थायी अधोसंरचना का निर्माण किया जा रहा है, जिससे अस्थायी निर्माण से होने वाली समस्याएं निर्मित न हों.
किसको मिलेगी यहां जमीन
महाकुंभ के तहत सभी मूलभूत सुविधाओं के साथ साधु-संतों के लिए आश्रम निर्माण के कार्य समानांतर रूप से होंगे. समाज के इच्छुक सनातन धर्मावलंबियों के माध्यम से अन्न क्षेत्र, धर्मशाला, आश्रम, चिकित्सा केंद्र, आयुर्वेद केंद्र आदि सार्वजनिक गतिविधियों के संचालन को भी प्राथमिकता दी जाएगी.
किसानों से 50′ जमीन जो ली जा रही है वह इतनी विकसित हो जाएगी कि बाकी की 50′ जमीन के दाम भी आसमान छुएंगे. पूरा एरिया आर्थिक रूप से उन्नत होगा और परमार्थ जन कल्याण में ड्यूटीरत संस्थाओं को अपने प्रकल्प बनाने के लिए जमीन दी जाएगी
