
ग्वालियर। गंगादास की शाला पर 25 हजार रुपए जुर्माना लगाया गया है। मप्र शासन ने वर्ष 2010 में वाद पेश किया। इसमें शासन (माफी) की जमीन के बेचने पर रोक लगाने, पूर्व में संपादित हुए विक्रय पत्र शून्य घोषित करने सहित विभिन्न मांग की गई। इसके खिलाफ ट्रस्ट मंदिर रामजानकी गंगादास की बड़ी शाला ने एक आवेदन दिया। जिसे सिविल न्यायालय ने 25 अप्रैल 2011 को खारिज कर दिया। इसके खिलाफ ट्रस्ट ने हाई कोर्ट में सिविल रिवीजन पेश की। 7 मई 2011 को हाई कोर्ट ने सिविल न्यायालय में चल रहे वाद की सुनवाई पर रोक लगा दी। 14 साल स्टे के बाद जब केस की सुनवाई हुई, तो ट्रस्ट की ओर से सिविल रिवीजन वापस लेने की बात कही गई। हाई कोर्ट ने इस पर अप्रसन्नता जताते हुए कहा – रिवीजन वापस लेने की मांग से ये स्पष्ट है कि 14 साल तक केस की सुनवाई पर स्टे लेने में सफल रहने के बाद अब दूसरा स्टैंड लिया जा रहा है। ऐसा करने से सिविल न्यायालय में लंबित वाद के निराकरण में देरी हुई। ऐसे में 25 हजार रुपए की कॉस्ट ट्रस्ट व अन्य याचियों पर लगाई जाती है। एक माह के भीतर राशि जमा नहीं करने की स्थिति में न केवल वसूली की कार्रवाई की जाए, बल्कि अवमानना का प्रकरण भी दर्ज किया जाए।
मामला ग्राम रमटापुरा, गदाईपुरा, भटपरासानी व अन्य जगह स्थित 150 करोड़ रुपए की जमीन का है। मप्र शासन ने 2010 में वाद पेश कर बताया कि राजस्व अभिलेख में भूमि मालिक माफी अतिय सरकार व कास्तकार के खाते में मंदिर श्री ठाकुर लिखा हुआ है। देवस्थान की संपत्ति किसी निजी व्यक्ति की नहीं हो सकती।
