नयी दिल्ली, 26 मई (वार्ता) श्याम लाल मीणा, जो सोल 1988 में भारत की पहली ओलंपिक तीरंदाजी टीम का हिस्सा थे, का रविवार रात लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया। वे 61 वर्ष के थे। भारतीय तीरंदाज ने अपनी तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल में भर्ती होने पर अंतिम सांस ली। वे पिछले कुछ सालों से लिवर से जुड़ी समस्याओं से जूझ रहे थे। 4 मार्च 1965 को राजस्थान के बांसवाड़ा जिले के केवडिया गांव में जन्मे श्याम लाल मीणा ने बहुत ही साधारण शुरुआत से उठकर भारतीय तीरंदाजी के अग्रदूतों में से एक बनने तक का सफर तय किया।
उन्होंने आर्थिक तंगी के बीच पारंपरिक बांस के धनुष से अभ्यास करना शुरू किया, लेकिन उनकी प्रतिभा जल्द ही निखर उठी और उन्हें सरकार की ‘स्पेशल एरिया गेम्स’ योजना के संरक्षण में एक उच्च-स्तरीय तीरंदाज के रूप में विकसित होने का मौका मिला।
श्याम लाल मीणा भारतीय पुरुषों की रिकर्व तीरंदाजी टीम का हिस्सा थे, जिसमें उनके साथ दिग्गज लिम्बा राम और रजत हलदर भी शामिल थे; इस टीम ने कोलकाता में आयोजित 1987 एशियाई तीरंदाजी चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था। इसे भारतीय तीरंदाजी के इतिहास में पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय पदक माना जाता है। इस पदक जीत के साथ ही भारत ने सोल 1988 ओलंपिक के लिए भी क्वालीफाई कर लिया, जो ग्रीष्मकालीन खेलों में भारतीय तीरंदाजी की पहली उपस्थिति थी।
श्याम लाल ने ट्रायल्स के माध्यम से सोल जाने वाली अंतिम टीम में भी जगह बनाई, और लिम्बा राम तथा संजीव सिंह के साथ मिलकर ओलंपिक में भारत की पहली तीरंदाजी टीम का गठन किया। सोल 1988 में व्यक्तिगत क्वालीफिकेशन राउंड में वे 71वें स्थान पर रहे, जबकि पुरुषों की रिकर्व टीम स्पर्धा में भारतीय तिकड़ी 20वें स्थान पर रही। वर्ष 1989 में, भारतीय तीरंदाजी में उनके अमूल्य योगदान के लिए श्याम लाल मीणा को प्रतिष्ठित ‘अर्जुन पुरस्कार’ से सम्मानित किया गया, जो भारत के सर्वोच्च खेल सम्मानों में से एक है। अपने करियर के दौरान, श्याम लाल मीणा ने कई अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व किया और राजस्थान तथा पूरे देश में तीरंदाजी को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रतिस्पर्धी खेलों से संन्यास लेने के बाद भी, वे बांसवाड़ा के जिला खेल प्रशिक्षण केंद्र में तीरंदाजी कोच के रूप में इस खेल से घनिष्ठ रूप से जुड़े रहे, जहाँ उन्होंने युवा खिलाड़ियों का मार्गदर्शन किया और जमीनी स्तर की प्रतिभाओं को निखारा।

