श्रावण की दूसरी सवारी में महाकाल के चंद्रमौलेश्वर रूप में दर्शन 

उज्जैन। उज्जैन में श्रावण मास में महाकाल की दूसरी सवारी सोमवार को नगर में धूमधाम से निकली। लाखों लोग सवारी देखने के लिए उमड़े। भगवान महाकाल ने चांदी की पालकी में चंद्रमौलेश्वर रूप में दर्शन देकर अभिभूत किया। इस सवारी से हाथी भी शामिल हो गया। चांदी के सिंहासन पर मनमहेश थे।

मप्र के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी दूसरी सवारी में शामिल होने उज्जैन पहुंचे। उन्होंने मंदिर पहुंचकर पूजन किया। इसके बाद डमरू बजाकर सवारी का स्वागत भी किया। राजेश पुजारी, आकाश पुजारी ने उनका पूजन कराया। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी सवारी पूजन में शामिल हुए। शाम 4 बजे सवारी मंदिर से शुरू हुई। पहली बार पुलिस के बैंड ने सफेद रंग की ड्रेस में शामिल होकर धार्मिक धुन बजाकर सवारी मार्ग पर समा बांध दिया। मुख्य द्वार पर सशस्त्र पुलिस बल के जवानों ने राजाधिराज महाकाल को सलामी देकर नगर भ्रमण के लिए रवाना किया। सवारी में आगे तोपची, घुड़सवार दल व भजन मंडलियां भी शामिल हुई। सवारी महाकाल चौराहा से निकलकर गुदरी, कहार वाडी से शिप्रा के रामघाट पहुंची जहां शिप्रा जल से भगवान का अभिषेक किया गया। इसके बाद रामानुजकोट, गणगौर दरवाजा, कार्तिक चौक, ढाबारोड, छत्री चौक, गोपाल मंदिर से गुजरी। मार्ग में लाखों श्रद्धालु पलक पावड़े बिछाकर बाबा के दर्शन की एक झलक पाने के लिए आतुर नजर आए।

रामघाट पर लोक नृत्य से

कलाकारों ने मंत्रमुग्ध किया

सवारी में पहली बार नई थीम के चलते रामघाट पर विभिन्न प्रदेशों से आए लोक नृत्य कलाकारों ने प्रस्तुति देकर हजारों श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध किया। इनमें मध्य प्रदेश का मटकी नृत्य, राजस्थान का गणगौर, असम का बिहू, गुजरात का भवाई और कर्नाटक का पुल कोट्टम नृत्य की प्रस्तुति दी गई। सवारी का लाइव प्रसारण फेसबुक पर किया गया। वहीं सवारी के आगे भी एलईडी स्क्रीन के माध्यम से श्रद्धालुओं को लाइव दर्शन करवाए गए।

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