शिवराज ने कृषि स्नातकों को अपने ज्ञान का उपयोग कृषि क्षेत्र के विकास पर करने का किया आह्वान

पूसा (बिहार), 17 जुलाई (वार्ता) केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुरुवार को समस्तीपुर में पूसा स्थित डॉ. राजेंद्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में भाग लिया और कृषि स्नातकों से अपने ज्ञान का उपयोग कृषि के विकास पर करने की अपील की।
श्री चौहान ने परिसर में नवनिर्मित विक्रमशिला छात्रावास और आर्यावर्त अंतरराष्ट्रीय अतिथि गृह का उद्घाटन किया तथा दो पुस्तकों – ‘पूसा बिहार: दी बर्थप्लेस ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च एंड एजुकेशन’ (पूसा बिहार: कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा की जन्म भूमि) और ‘टेक्स्टबुक ऑन नेचुरल फॉर्मिंग’ (प्राकृतिक कृषि की पाठ्य पुस्तक) का विमोचन किया। समारोह में कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर, बिहार के उपमुख्यमंत्री एवं कृषि मंत्री विजय सिन्हा, राज्य के सूचना जनसंपर्क मंत्री महेश्वर हजारी, समस्तीपुर की सांसद शाम्भवी चौधरी और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
कृषि मंत्री ने दीक्षा प्राप्त छात्रों को अपने ज्ञान का उपयोग कृषि के विकास पर करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा, “आप अनंत शक्तियों के भंडार हैं, जैसा स्वामी विवेकानंद जी ने कहा था। मेहनत करें, बड़े लक्ष्य निर्धारित करें और अपने ज्ञान का उपयोग कृषि क्षेत्र में करें। पूसा विश्वविद्यालय से प्राप्त शिक्षा के साथ आप भारत की कृषि को नई ऊँचाइयों तक ले जाएँ।”
उन्होंने कहा, “किसान भारतीय अर्थव्यवस्था की आत्मा हैं और उनकी सेवा हमारा धर्म है। हमें प्रति हेक्टेयर उत्पादन बढ़ाने, छोटी मशीनों के माध्यम से खेती में मशीनीकरण लाने और स्टार्टअप के जरिए आधुनिकता को बढ़ावा देने की आवश्यकता है।”
श्री चौहान ने प्राकृतिक खेती की महत्ता पर जोड़ देते हुए कहा कि यह धरती की सेहत के लिए जरूरी है। उन्होंने हाल ही में घोषित प्रधानमंत्री धन धान्य योजना का उल्लेख किया, जिसके तहत 100 जिलों में कृषि उत्पादन बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने छात्रों से आह्वान किया कि वे अपने ज्ञान और अनुसंधान को व्यावहारिक उपयोग में लाएँ और भारत की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने में योगदान दें।
कृषि मंत्री ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में कृषि क्षेत्र में उत्पादन में 40 प्रतिशत वृद्धि और 50 हजार करोड़ रुपये के बासमती चावल निर्यात जैसी देश की उपलब्धियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बिहार में मक्का, लीची और मखाना के उत्पादन में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है।
श्री चौहान ने मखाना बोर्ड के गठन के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को धन्यवाद दिया। उन्होंने बिहार की समृद्ध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत की सराहना की और कहा, “मिथिलांचल का प्रवेश द्वार समस्तीपुर है। मिथिलांचल, यह राजा जनक और माता सीता की पावन भूमि है, जो भारतीय नारियों का आदर्श हैं।” उन्होंने प्रथम राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. राजेंद्र प्रसाद और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री कर्पूरी ठाकुर को इस अवसर पर याद करते हुए कहा कि बिहार की धरती प्रतिभा और मेहनत का केंद्र है। राज्य की धरती ने विश्व को बुद्ध का संदेश दिया है।
बिहार सरकार द्वारा पूसा में 1970 में स्थापित डॉ. राजेंद्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय को 07 अक्टूबर 2016 को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्ज दिया था।

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