वर्तमान-पूर्व विधायक के साथ बंद कमरे में डिप्टी सीएम की बैठक

विंध्य की डायरी

डा0 रवि तिवारी

सिरमौर जनपद पंचायत में अध्यक्ष को लेकर भाजपा समर्थित सदस्य बगावत में है. कई दिनो से सियासी विवाद अब अविश्वास प्रस्ताव तक पहुंच गया है. अध्यक्ष रवीना साकेत के खिलाफ 19 सदस्यो ने कलेक्टर के समक्ष अविश्वास प्रस्ताव पेश किया. जिससे तख्ता पलट की स्थित बन गई है. अब सवाल यह उठता है कि विपक्ष में बैठी कांग्रेस क्या इतनी ताकत वर हो गई कि सत्ता पक्ष का तख्ता पलट कर दे. सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह ने अध्यक्ष बनाने में अहम भूमिका निभाई थी और अब सवाल उठता है कि अध्यक्ष को बचाने में क्या विधायक सफल रहेंगे ? आखिर यह बगावत सदस्यो ने किसके इशारे पर की है.

पर्दे के पीछे खेल कौन कर रहा है. पूर्व और वर्तमान विधायक की खेमेबाजी के चलते यह स्थिति निर्मित हुई है. मामला संगठन तक पहुंचा और पार्टी डैमेज कंट्रोल में जुट गई है. रविवार को भाजपा जिलाध्यक्ष बीरेन्द्र गुप्ता ने दोनो पक्षों की बैठक ली और समझाइश दी उसके बाद प्रदेश के उपमुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला ने पार्टी कार्यालय में सिरमौर विधायक दिव्यराज सिंह एवं सेमरिया से पूर्व विधायक केपी त्रिपाठी के साथ सभी जनपद सदस्यो की बंद कमरे में बैठक ली. माना जा रहा है कि अविश्वास प्रस्ताव को रोकने के लिये यह अहम बैठक हुई है. सदस्यो ने बैठक में अपना पक्ष खुलकर रखा है. बैठक के बाद विवाद का पटाक्षेप हो गया है उधर कांग्रेस ने चुटकी लेते हुए कहा कि विधायक दिव्यराज सिंह और पूर्व विधायक केपी त्रिपाठी के बीच यह आंतरिक द्वंद्व है. जिसका परिणाम अविश्वास प्रस्ताव है.

महिला की मौत पर राज्यमंत्री पर उठे सवाल

स्वतंत्र भारत के 78 साल बीत चुके है पर आज भी गांवो का भारत मूलभूत सुविधाओ से वंचित है. इससे शर्मनाक और क्या हो सकता है जब सडक़ के अभाव में एक महिला अस्पताल पहुंचने के पहले ही जिंदगी की लड़ाई हार जाय. आजादी का अमृत महोत्सव तिरंगा यात्रा के साथ मनाया जा रहा है. नारी सशक्तिकरण की दुहाई दी जा रही है पर वही नारी सिस्टम का शिकार हो रही है.

बीमार महिला को चारपाई में लिटा कर कच्चे रास्ते से अस्पताल लेकर जाने का प्रयास किया गया पर महिला ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया. समूचे सिस्टम को कटघरे में खड़ा करने वाली यह घटना सतना नागौद तहसील के द्वारी खुर्द की है. जहां एक महिला मरीज खाट में दम तोड़ देती है. अगर रोड होती तो शायद जिंदगी अस्पताल पहुंचने पर बच जाती. अब सवाल यह उठता है कि इस मौत के लिये जिम्मेदार कौन है प्रशासन तंत्र या जनप्रतिनिधि? सबसे शर्मनाक पहलु तो यह है कि यह घटना जिस क्षेत्र में हुई है वह क्षेत्र राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के विधानसभा क्षेत्र में आता है. ऐसे में सवाल राज्य मंत्री से है , क्या इस मौत की कीमत पर गांव वालो को सड़क आप दिलवा पाएगी?

घर में घुसा पानी तो छलका विधायक का दर्द

बारिश से चारो तरफ हाहाकार मचा हुआ है, फिर चाहे अमीर हो या गरीब जनता हो या जनप्रतिनिधि हर कोई प्रभावित है. बीहर नदी के किनारे बने गुढ़ विधायक नागेन्द्र सिंह के घर के अंदर पानी घुस गया. फिर क्या था विधायक जी ने नाराजगी जाहिर करते हुए अपनी ही सरकार के कामकाज को कटघरे में खड़ा कर दिया. सवाल उठाते हुए उन्होने कहा कि मैं जनप्रतिनिधि हूं और खुद एक बाढ़ पीडि़त हूं. मेरे घर में पानी भरा हुआ है, कोई देखने तक नही आया.

बाढ़ के पीछे कई कारण का उल्लेख करते हुए उन्होने आरोप लगाया कि शहर के चारो तरफ बाईपास बनाकर रीवा को तालाब बना दिया है. कई वर्षो से बाढ़ को देख रहा हूं. बगैर नाम लिये उन्होने नेता और सरकार पर सवाल उठाते हुए कटाक्ष किया है. कही न कही कंक्रीट का जो विकास हो रहा है उसको लेकर खुले तौर पर तो नही बल्कि इशारो ही इशारो में विधायक जी ने बहुत कुछ कह दिया. समझने वाले बखूबी समझ गए है कि उनका इशारा प्रदेश के किस कद्दावर नेता की तरफ था.

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