नयी दिल्ली, 16 जुलाई (वार्ता) गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने बुधवार को यहां प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की।
श्री देवव्रत ने श्री मोदी द्वारा प्रारंभ किये गये ‘राष्ट्रीय प्राकृतिक कृषि मिशन’ की सराहना करते हुए इसे भारत के कृषि भविष्य की दिशा में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी पहल बताया। उन्होंने कहा कि इस मिशन ने देशभर में प्राकृतिक खेती के प्रति अभूतपूर्व जागरुकता फैलायी है। किसानों के बीच रासायनिक खेती के दुष्परिणामों की समझ बढ़ी है और एक वैकल्पिक और टिकाऊ कृषि पद्धति की ओर उनका रुझान सशक्त हुआ है। इस अवसर पर दोनों महानुभावों के बीच प्राकृतिक कृषि को जन आंदोलन बनाने और इसे राष्ट्रव्यापी स्तर पर सफलतापूर्वक लागू करने को लेकर गंभीर और सकारात्मक चर्चा हुई।
राज्यपाल ने प्रधानमंत्री को अवगत कराया कि गुजरात राज्य में प्राकृतिक कृषि को लेकर निरंतर प्रोत्साहन दिया जा रहा है। लाखों किसानों ने इस पद्धति को अपनाकर लागत में कमी, मृदा की उर्वरता में वृद्धि और उत्पाद की गुणवत्ता में सुधार का प्रत्यक्ष अनुभव किया है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि हालिया शोधों से यह स्पष्ट हुआ है कि रासायनिक कृषि पद्धति की तुलना में प्राकृतिक कृषि अपनाने पर उत्पादन में कोई कमी नहीं आती, बल्कि कई मामलों में उत्पादन बढ़ता है और उपज की गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार होता है। गुजरात के कृषि विश्वविद्यालयों, कृषि विज्ञान केंद्रों और गैर-सरकारी संस्थानों को इस दिशा में जोड़कर प्राकृतिक कृषि को एक व्यापक आंदोलन का स्वरूप दिया गया है।
प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि देश के किसान इस आंदोलन को अपनाकर कृषि क्षेत्र में एक नयी हरित क्रांति लायेंगे, जो रसायनरहित, पर्यावरण अनुकूल और मानव स्वास्थ्य के लिए हितकारी होगी।
राज्यपाल आचार्य देवव्रत ने प्रधानमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके प्रखर नेतृत्व में भारत आत्मनिर्भरता, जैव विविधता और समग्र ग्रामीण विकास की दिशा में अग्रसर हो रहा है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में प्राकृतिक कृषि मिशन न केवल भारत के लिए बल्कि समस्त विश्व के लिए एक आदर्श मॉडल सिद्ध होगा।
