तहसीलदारों को न्यायालय और गैर न्यायालय में बांटने का विरोध, फैसला वापस न हुआ तो 21 जुलाई से काम बंद

ग्वालियर। तहसीलदारों की पदस्थापना को लेकर मोहन कैबिनेट के एक माह पुराने फैसले का प्रदेश के तहसीलदार विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस फैसले से लोगों को सुविधा मिलने की बजाय दिक्कत बढ़ेगी। कुछ जिलों में कलेक्टरों ने कैबिनेट के फैसले के आधार पर आदेश भी जारी कर दिए हैं, जिसे वापस लेने की मांग की जा रही है। ऐसा न करने पर तहसीलदार और नायब तहसीलदार 21 जुलाई से काम बंद करेंगे।

कनिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी (तहसीलदार) संघ ने तहसीलदार और नायब तहसीलदार कैडर के अफसरों के बीच न्यायालयीन और गैर न्यायालयीन कार्य विभाजन का विरोध किया है। संघ ने कहा है कि अफसरों के बीच इस तरह का विभाजन किसी स्टडी, किसी समिति की सिफारिश और पारदर्शी मापदंड को अपनाए बगैर किया जा रहा है। इसका कोई ठोस और तार्किक कारण भी नहीं है। इस तरह के निर्णय से कार्यक्षमता कैसे बढ़ेगी? गैर न्यायालयीन कार्यों के लिए संभागीय मुख्यालयों के जिलों में 14 और अन्य जिलों में 8 तहसीलदार और नायब तहसीलदार चिन्हित करने का काम किस आधार पर किया गया है, यह भी इसमें स्पष्ट नहीं है।

तहसीलदारों का यह भी कहना है कि इस मामले में संयुक्त परामर्शदात्री समिति से सहमति ली जानी चाहिए जो नहीं ली गई है। इस मामले में संघ को विश्वास में लिए बगैर फैसला किया गया है। संघ का आरोप है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा 6 के अंतर्गत कार्यपालिक मजिस्ट्रेट को क्रिमिनल कोर्ट का एक वर्ग माना गया है, जिसे नियुक्त करने की शक्ति धारा 14 के अंतर्गत शासन को है। जबकि प्रमुख राजस्व आयुक्त के आदेश के पालन में कलेक्टर इस तरह के पदों पर नियुक्तियां कर रहे हैं, जो उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। इसके लिए जबलपुर और सिवनी में आदेश भी जारी किए गए हैं।

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