मंडला: बड़े धूमधाम से ‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान की शुरुआत हुई। संदेश दिया गया — ‘नशा छोड़िए, स्वस्थ रहिए।’ मगर जनता मन ही मन पूछ रही है — ‘हुजूर! नशे के कारोबारियों को कब दिखेगी लाल बत्ती ?’दरअसल, मंडला जिले की हकीकत यह है कि हर गली, हर चौराहे, हर मोहल्ले में गांजा, स्मैक, और देसी शराब का कारोबार बेरोकटोक चल रहा है। ‘नशे से दूरी’ का संदेश जरूर गूंजा, मगर हकीकत में नशा हर गली में आसानी से ‘होम डिलीवरी’ हो रहा है। दिलचस्प बात ये कि इसकी खबर पुलिस-प्रशासन से लेकर आबकारी विभाग तक को है । बावजूद इसके कार्रवाई साल में इक्का-दुक्का, वो भी खानापूर्ति की तरह।
हर मोहल्ले में कुचिया’ नाम के धंधेबाज गाड़ी भर-भर कर शराब बेच रहे हैं। पड़ोसी जिलों से शराब की खेप आती है और फिर मंडला की गलियों में खपाई जाती है। रेड भी पड़ती है, मगर उन्हीं पर जिनसे मन नहीं मिलता नहीं होती। नतीजा — नशे का जाल हर दिन मजबूत होता जा रहा है।अब सवाल उठता है कि अगर सब कुछ यूं ही चलता रहा तो आखिर प्रशासन और सरकार का ‘हरी झंडी अभियान’ किसके लिए ? क्या ये सिर्फ कागजों में जागरूकता दिखाने का खेल है या फिर हर साल की परंपरा जिसे निभाना जरूरी है ? जनता तो अब समझ चुकी है कि ‘शो ऑफ’ से नशा नहीं रुकेगा, इसके लिए असल कार्रवाई जरूरी है।
रैली में ‘हमारा है यही संदेश, नशा मुक्त हो मध्यप्रदेश’ के नारे गूंजे, पर जनता का सवाल — ‘अधिकारियों की मिलीभगत मुक्त मंडला कब होगा ?’ हरी झंडी तो दिख गई… अब जनता ये देखना चाहती है कि प्रशासन कब उन गलियों में रेड डालता है, जहां दिन-रात नशे का बाजार सजा है। वरना, यह अभियान भी कुछ दिन का तमाशा बनकर रह जाएगा।
