ओंकारजी महाराज एवं श्री ममलेश्वरजी नगर भ्रमण के लिए निकले 

ओंकारेश्वर। श्रावण मास के प्रथम सोमवार को ज्योतिर्लिंग भगवान की सजी हुई पालकी में सवार होकर ढोल के साथ निकले । दक्षिण तट पर ममलेश्वर भगवान की पालकी भी निकली । भगवान धूमधाम से कोटितीर्थ घाट पर पहुंचे । घाट पर विद्वान पंडितों द्वारा वेद मंत्रों के द्वारा पूजा अर्चना पंचामृत और नर्मदा जल से भगवान की पूजा पंडितों द्वारा की गई महाआरती के बाद दोनों पालकियों को नर्मदाजी के पवित्र जल में नौका विहार कराया गया । दोनों पालकियां गौ मुख घाट पर उतरकर आगे बढ़ी । यहां से भक्त लोग भोलेशंभू भोलेनाथ का उद्घोष करते हुवे आगे आगे चल रहे थे ।

मार्ग में ढ़ोलको की थाप पर भक्त नाच रहे थे ।

हजारों भक्त भगवान के दर्शन करने पलक पावड़े बिछाए मार्ग पर खड़े थे ।

पालकी के साथ हजारों भक्त आनंद लेते हुवे चल रहे थे ।

मार्ग में जगह जगह गुलाल और गुलाब की पंखुड़ी उड़ाकर स्वागत कर रहे थे और कपूर आरती कर अभिवादन कर रहे थे ।

प्रशासन ने पुख्ता प्रबंध किए थे। पालकी के साथ पुलिस बल भी लगाया ।

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