मंडला: विकास के दावों के बीच मवई विकासखंड के टिकरिया ग्राम पंचायत की हकीकत आज भी काला पानी जैसी है। टिकरिया और आसपास के पांच गांवों को जोड़ने वाला गहिरनाला आज भी पुलिया विहीन है। नतीजा – स्कूली बच्चे, गर्भवती महिलाएं और ग्रामीण जान जोखिम में डालकर नदी पार कर रहे हैं।सोशल मीडिया में वायरल वीडियो में लोग तेज बहाव में पत्थरों और लकड़ियों के सहारे नदी पार करते दिख रहे हैं। अभिभावक बच्चों को स्कूल भेजने में डरते हैं – कोई भरोसा नहीं कि बच्चा वापस लौटेगा या नहीं।
इन गांवों को बिछिया, घुटास और घोंटा जैसे क्षेत्रों से जोड़ने के लिए ग्रामीणों को 60 किलोमीटर लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है – “जो सरकार यहां पुल बना देगी, हम जीवनभर आभारी रहेंगे।”सीमा से लगे मवई में औषधीय वनों और साल के पेड़ों की भरमार है, लेकिन बुनियादी सुविधा एक पुलिया तक नहीं। आदिवासी क्षेत्र के नाम पर योजनाएं तो बनती हैं, पर जमीनी हालात अब भी जस के तस हैं। जरूरत है सड़क नहीं, सीधी कार्रवाई की।
